
petrol diesel price hike 2026 : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर साफ दिखाई देने लगा है। देश की प्रमुख सरकारी Oil Marketing Companies (OMCs) — इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम — पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर भारी वित्तीय दबाव झेल रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन कंपनियों को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन आम लोगों को राहत देने के लिए भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। इसका सीधा असर सरकारी तेल कंपनियों की कमाई पर पड़ रहा है। कंपनियां महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीद रही हैं, लेकिन घरेलू बाजार में उसे अपेाकृत कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं।
सरकार ने दी जानकारी
oil marketing companies loss news : केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि सरकारी तेल कंपनियों पर ईंधन बिक्री का बोझ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG की बिक्री पर कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल पर भी कंपनियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और गैस महंगे हो चुके हैं, लेकिन आम उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से कंपनियां ईंधन की कीमतों में पूरी बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं। इससे कंपनियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
सरकार ने घटाई एक्साइज ड्यूटी
petrol diesel latest price today : सरकार ने तेल कंपनियों पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी की है। मंत्रालय के अनुसार इस फैसले से केंद्र सरकार पर लगभग ₹14,000 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ा है। इसके बावजूद कंपनियों की अंडर-रिकवरी लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या होती है अंडर-रिकवरी?
अंडर-रिकवरी का अर्थ उस अंतर से होता है, जो ईंधन की वास्तविक लागत और उपभोक्ताओं से वसूली गई कीमत के बीच होता है। यानी कंपनियां जिस कीमत पर ईंधन खरीदती हैं और जिस कीमत पर उसे बेचती हैं, दोनों के बीच यदि घाटा होता है तो उसे अंडर-रिकवरी कहा जाता है। हालांकि इसका मतलब हर बार सीधा नकद नुकसान नहीं होता, क्योंकि कंपनियों की कुल लागत में कई अन्य फैक्टर भी शामिल होते हैं। लेकिन लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर कंपनियों की वित्तीय हालत पर गंभीर असर पड़ सकता है।

पेट्रोल और डीजल पर कितना नुकसान?
crude oil price impact : सरकारी सूत्रों के मुताबिक वर्तमान स्थिति में पेट्रोल की बिक्री पर लगभग ₹20 प्रति लीटर तक की अंडर-रिकवरी हो रही है, जबकि डीजल पर यह नुकसान और भी ज्यादा बताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा घरेलू रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर पर भी कंपनियों को भारी सब्सिडी जैसा भार उठाना पड़ रहा है। यही कारण है कि कंपनियों की बैलेंस शीट पर लगातार दबाव बन रहा है।
मिडिल ईस्ट संकट बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से तेल उत्पादक देशों से सप्लाई प्रभावित होने का डर बना हुआ है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल के दाम तेजी से ऊपर गए हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर पड़ता है।
शेयर बाजार में भी दिखा असर
युद्ध और बढ़ती लागत का असर सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दे रहा है। 28 फरवरी के बाद से इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों के शेयरों में करीब 12% से 23% तक गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को डर है कि यदि कंपनियां लंबे समय तक घाटे में ईंधन बेचती रहीं तो उनके मुनाफे पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कंपनियों ने अन्य ईंधनों के दाम बढ़ाए
हालांकि आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं, लेकिन तेल कंपनियों ने नुकसान की भरपाई के लिए कुछ अन्य उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। प्रीमियम पेट्रोल, थोक डीजल, कमर्शियल LPG और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले ATF की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। कंपनियां कोशिश कर रही हैं कि आम उपभोक्ता पर सीधा बोझ कम पड़े और खुदरा कीमतों में अचानक उछाल न आए।
फिलहाल क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल की कीमत करीब ₹94.77 प्रति लीटर है, जबकि डीजल लगभग ₹87.67 प्रति लीटर बिक रहा है। पिछले कुछ समय से इन कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे और कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है।



