
Rajsamand Pashu Mela : राजसमंद। जिले में अक्टूबर महीने के दौरान आयोजित होने वाले आमेट, कुंवारिया और देवगढ़ के प्रमुख मेलों में इस बार भी पशुओं की खरीद-बिक्री नहीं हो सकेगी। लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम को लेकर पशुओं के आवागमन और परिवहन पर प्रतिबंध जारी है। इसी के चलते प्रशासन ने मेलों में पशुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही पशुपालक लगातार चौथे साल पारंपरिक पशु खरीद-बिक्री के अवसर से वंचित रहेंगे।
Amet Pashu Mela : आमेट में 5 से 10 अक्टूबर तक नगर पालिका का सांस्कृतिक मेला आयोजित होगा। वहीं कुंवारिया में 11 से 15 अक्टूबर तक जोहिड़ा भैरू पशु मेला और देवगढ़ में 15 से 25 अक्टूबर तक दशहरा मेला लगेगा। इन मेलों में रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, लेकिन पशुओं की खरीद-बिक्री नहीं होने से पारंपरिक पशु मेले का स्वरूप इस बार भी प्रभावित रहेगा। इन मेलों में पहले बैलों की जोड़ियों की खरीद-बिक्री प्रमुख आकर्षण हुआ करती थी। हालांकि खेती में मशीनरी और आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ बैलों की मांग में कमी आई है। इसके बाद गाय, भैंस सहित अन्य दुधारू पशुओं की खरीद-बिक्री ने प्रमुख स्थान बना लिया। अब पशुओं के प्रवेश पर रोक का सीधा असर दुधारू पशुओं के कारोबार पर भी देखने को मिल रहा है।
कलेक्टर ने जारी किए निर्देश
Kuwariya Pashu Mela : लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से भी सख्ती बरती जा रही है। कलेक्टर ने 16 सितंबर को पत्र जारी कर पशुओं के आवागमन, परिवहन और अन्य प्रतिबंधात्मक उपायों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से पशुपालकों और संबंधित लोगों के लिए लंपी बीमारी से बचाव को लेकर गाइडलाइन भी जारी की गई है।

2022 में लंपी का रहा था व्यापक असर
Devgarh Pashu Mela : गौरतलब है कि वर्ष 2022 में राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज का व्यापक असर देखने को मिला था। 31 दिसंबर 2022 तक प्रदेश के 32 जिलों में 15.67 लाख पशु इस बीमारी से प्रभावित हुए थे, जबकि 76,030 पशुओं की मृत्यु हुई थी। इसी अनुभव को देखते हुए पशुओं में संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासन की ओर से मेलों में पशुओं के प्रवेश और खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध जारी रखा गया है।



