
Udaipur royal family property dispute : उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में दशकों से चला आ रहा संपत्ति विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को उनके ही परिवार के सदस्यों द्वारा चुनौती दी गई है। विवाद का केंद्र सिटी पैलेस, एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स और अन्य बहुमूल्य संपत्तियां हैं, जिनके उत्तराधिकार को लेकर परिवार में मतभेद गहराते जा रहे हैं।
Arvind Singh Mewar will case : यह विवाद अरविंद सिंह मेवाड़ के बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और बेटी पद्मजा कुमारी परमार के बीच चल रहा है। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को मेवाड़ राजपरिवार का उत्तराधिकारी माना जाता है और वे एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स के प्रमुख भी हैं। वहीं उनकी बहन पद्मजा कुमारी ने पिता की वसीयत की वैधता पर सवाल उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दोनों पक्षों का दावा है कि पारिवारिक संपत्तियों पर उनका समान अधिकार है, जबकि वसीयत के अनुसार संपत्ति के बंटवारे को लेकर असहमति बनी हुई है।
मामला दिल्ली हाईकोर्ट में होगा ट्रांसफर
Lakshyaraj Singh Mewar news : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि यह मामला उत्तराधिकार और वसीयत की वैधता से जुड़ा है। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मुंबई हाईकोर्ट में लंबित मामलों को राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी, जबकि दूसरी ओर पद्मजा कुमारी ने जोधपुर बेंच में चल रहे मामलों को बॉम्बे हाईकोर्ट भेजने का आग्रह किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में इस विवाद से जुड़े अन्य मामले सामने आते हैं, तो उन्हें भी दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जा सकता है। इस केस की अगली सुनवाई 11 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में होगी। HRH Group property dispute
दशकों पुराना है मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद
Mewar royal family court case : मेवाड़ के पूर्व महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ के समय से ही यह संपत्ति विवाद चला आ रहा है। भगवत सिंह मेवाड़ के तीन संतानें थीं—महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और योगेश्वरी कुमारी। वर्ष 1983 में भगवत सिंह द्वारा पारिवारिक संपत्तियों को बेचने और लीज पर देने के फैसले का उनके बड़े बेटे महेंद्र सिंह ने विरोध किया था और मामला अदालत तक पहुंच गया था। इस विवाद के बाद भगवत सिंह मेवाड़ ने अपनी वसीयत और संपत्ति से जुड़े अधिकार छोटे बेटे अरविंद सिंह मेवाड़ को सौंप दिए। 1984 में भगवत सिंह के निधन के बाद पारिवारिक विवाद और गहरा गया, जो लगभग 37 वर्षों तक अदालतों में चलता रहा। City Palace Udaipur property dispute

2020 में आया था बड़ा फैसला
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2020 में उदयपुर की जिला अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित संपत्तियों को चार हिस्सों में बांटने का आदेश दिया, जिसमें एक हिस्सा भगवत सिंह मेवाड़ के नाम और बाकी तीन हिस्से उनकी संतानों के बीच बांटे गए।हालांकि, अधिकांश संपत्तियों पर अरविंद सिंह मेवाड़ का ही कब्जा बना रहा, जबकि महेंद्र सिंह मेवाड़ और योगेश्वरी कुमारी को सीमित अधिकार मिले। कोर्ट ने शंभू निवास पैलेस, बड़ी पाल और घासघर जैसी संपत्तियों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी थी।
