
राजसमंद : Rajsamand Maharana Raj Singh Statue : यातायात सुरक्षा और सरकारी नियमों के चलते शहर के एक प्रमुख मार्ग पर मूर्ति स्थापना के प्रस्ताव को तकनीकी रूप से अनुपयुक्त घोषित कर दिया है। उदयपुर जोन के वरिष्ठ नगर नियोजक कार्यालय ने राजनगर कांकरोली मार्ग स्थित जल चक्की तिराहे पर महाराणा राजसिंह की मूर्ति स्थापित करने के संबंध में अपनी तकनीकी राय अतिरिक्त संभागीय आयुक्त को भेज दी है।
इस रिपोर्ट में साफ किया है कि प्रस्तावित जगह दो मुख्य सड़कों के जंक्शन पर स्थित होने के कारण वहां मूर्ति लगाने से शहर का यातायात बुरी तरह प्रभावित होगा। ऐसे में नगर परिषद को निर्देश दिया कि वह मूर्ति स्थापना के लिए किसी अन्य उपयुक्त जगह का चयन करे। इससे पहले 6 मई को डिप्टी सीएम दीयाकुमारी के कार्यक्रम में इस तिराहे का शिलान्यास करने का कार्यक्रम भी बना था, लेकिन तकनीकी मंजूरी नहीं मिलने के कारण उसे निरस्त करना पड़ा। विधायक दीप्ति माहेश्वरी और तत्कालीन सभापति अशोक टांक ने भी इस तिराहे का दौरा कर जल्द काम करने के निर्देश दिए थे, मगर अब तकनीकी पेंच के कारण इस जगह पर योजना अटक गई है।
चक्की तिराहा बना अड़चन
Rajsamand Statue Controversy : वरिष्ठ नगर नियोजक की तकनीकी राय के अनुसार जिस जल चक्की तिराहे पर महाराणा राजसिंह की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया, वह स्थान बेहद व्यस्त है। यह जगह दो मुख्य सड़कों, राजनगर कांकरोली सड़क और नाथद्वारा रोड के जंक्शन यानी तिराहे के बिल्कुल बीच में आती है। यदि यहां मूर्ति स्थापित की जाती है, तो राजनगर कांकरोली की मौजूदा सड़क का एक बड़ा हिस्सा इसके दायरे में आ जाएगा। इसके अलावा इन दोनों ही मुख्य सड़कों के समानांतर नगर के सबसे प्रमुख और पुराने व्यापारिक प्रतिष्ठान व बाजार स्थित हैं। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार के निर्माण या मूर्ति स्थापना से स्थानीय व्यापार और आम लोगों का आवागमन सीधे तौर पर प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

स्वायत्त शासन विभाग के 29 साल पुराने आदेश का हवाला
Maharana Raj Singh Statue News : इस मामले में वरिष्ठ नगर नियोजक अरविंदसिंह कानावत ने स्वायत्त शासन विभाग के पुराने नियमों का भी हवाला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वायत्त शासन विभाग के 1 मार्च 1997 के एक आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए कि यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की दृष्टि से किसी भी चौराहे या तिराहे के बीच में प्रतिमाएं स्थापित नहीं की जा सकती हैं। इस कानूनी और तकनीकी अड़चन के कारण सड़कों के बीच में प्रस्तावित इस जगह पर मूर्ति लगाना नियमों के खिलाफ है। विभाग ने नगर परिषद को राय दी है कि वे इस व्यस्त चौराहे को छोड़कर शहर में किसी अन्य उपयुक्त जगह का चयन करें, ताकि यातायात प्रभावित न हो और नियमों का पालन भी हो सके।
कल की जरूरतों को देखते हुए आज आपत्ति
Rajsamand Traffic Issue : नगर नियोजन विभाग का मुख्य काम शहरों का व्यवस्थित विकास करना और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक यातायात व बुनियादी ढ़ांचे को सुरक्षित रखना है। किसी भी शहर के मुख्य तिराहे या चौराहे पर जब कोई निर्माण या मूर्ति स्थापना का प्रस्ताव आता है, तो विभाग सड़क की चौड़ाई, भविष्य में वाहनों का दबाव और स्थानीय बाजारों की स्थिति का तकनीकी आकलन करता है। इस मामले में भी विभाग ने 1997 के पुराने आदेश और वर्तमान यातायात की स्थिति को आधार बनाकर यह रिपोर्ट तैयार की है, ताकि भविष्य में होने वाले सड़क हादसों या ट्रैफिक जाम की स्थिति से बचा जा सके।
40 लाख में गनमेटल प्रतिमा व सौंदर्यीकरण का था प्रस्ताव
Jal Chakki Tiraha Rajsamand : शहर की पहचान और ऐतिहासिक गौरव को नई ऊंचाई देने के लिए नगर परिषद ने जल चक्की तिराहे पर मेवाड़ के शासक और राजसमंद के संस्थापक महाराणा राजसिंह की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी की थी। करीब 40 लाख रुपए की इस योजना के तहत तिराहे का पूरा स्वरूप बदला जाना था। योजना के अनुसार 25 लाख रुपए की लागत से गनमेटल से मजबूत और आकर्षक प्रतिमा बनाई जानी थी, जबकि 15 लाख रुपए सिविल कामों पर खर्च होने थे। तिराहे पर तीन मीटर चौड़ा सर्किल विकसित किया जाना था, जिसके बीच में करीब साढ़े सात फीट ऊंची और 600 किलोग्राम वजनी प्रतिमा स्थापित होनी थी। वर्तमान में यहां महाराणा राजसिंह की अर्ध प्रतिमा और ट्रैफिक पुलिस के लिए छतरी बनी हुई है।
इनका क्या कहना है
उदयपुर जोन के वरिष्ठ नगर नियोजक कार्यालय से जल चक्की तिराहे पर महाराणा राजसिंह की प्रतिमा को लेकर तकनीकी मंजूरी नहीं मिली है। आदेश में प्राप्त तकनीकी समस्याओं का निवारण करते हुए वापस प्रस्ताव भेजा जाएगा ताकि तिराहे पर प्रतिमा लगाई जा सके।
-तरुण बायेती, एक्सईएन, नगर परिषद राजसमंद



