
Kumbhalgarh Political Controversy : दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में चारभुजा में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बाद कथित पोस्टर विवाद अब कुंभलगढ़ की राजनीति का नया मुद्दा बन गया है। प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से माता की तस्वीर वाले पोस्टर के उपयोग और उसे जलाए जाने के आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर कुंभलगढ़ विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ ने इसे गंभीर बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता योगेंद्रसिंह परमार ने पूरे घटनाक्रम को भाजपा की राजनीतिक साजिश करार देते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
Yogendra Singh Parmar कांग्रेस नेता योगेंद्रसिंह परमार ने कहा कि चारभुजा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन किया था, लेकिन किसी भी धार्मिक चित्र या पोस्टर को जलाने जैसी कोई घटना नहीं हुई। उनके अनुसार प्रदर्शन के बाद पुतलों और पोस्टरों का कोई अवशेष तक नहीं बचा था। परमार का आरोप है कि भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने बाद में नया पोस्टर जलाकर उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल की और धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया। परमार ने कहा कि भाजपा के पास जनता से जुड़े मुद्दे नहीं बचे हैं, इसलिए वह अनावश्यक विवाद खड़े कर रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि कहीं धार्मिक आयोजनों के बाद फ्लेक्स और बैनर पड़े हों तो भाजपा कार्यकर्ता उन्हें अपने घर ले जाकर सुरक्षित रख लें, लेकिन इस तरह की औछी राजनीति से जनता अब भली-भांति परिचित हो चुकी है। उन्होंने विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा ने नए राजनीतिक मुद्दे तलाशने शुरू कर दिए हैं। परमार ने कहा कि यदि किसी को इस पूरे घटनाक्रम से धार्मिक आस्था के स्तर पर ठेस पहुंची हो तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं और माफी मांगता हूं। साथ ही उन्होंने विधायक को चुनौती देते हुए कहा- राठौड़ साहब, आप कोशिश कर लीजिए, हम रुकने वाले नहीं हैं।

Surendra Singh Rathore Statement : उधर कुंभलगढ़ विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा प्रधानमंत्री के पुतले के साथ माता की तस्वीर वाले बैनर को जलाने की बात सामने आई है, जो अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कृत्य की निंदा होनी चाहिए। राठौड़ ने कांग्रेस नेता योगेंद्रसिंह परमार पर तंज कसते हुए कहा कि इतने बावले मत हो कि जैसे राहुल गांधी अभी प्रधानमंत्री बनने वाले हों और आप विधायक बनने वाले हों।
विधायक ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की कांग्रेस को राजनीतिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ेगी। साथ ही उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि Rajsamand Latest News कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर ही विरोध दर्ज कराया जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। कांग्रेस जहां पूरे विवाद को भाजपा की सोची-समझी रणनीति बता रही है, वहीं भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है। पोस्टर किसने जलाया और वायरल तस्वीरों की वास्तविकता क्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद कुंभलगढ़ की स्थानीय राजनीति में और गर्मा सकता है।
मुद्दों से भटकेगी राजनीति या मिलेगा समाधान?
BJP vs Congress : लोकतंत्र में विरोध और प्रतिरोध दोनों आवश्यक हैं, लेकिन जब जनहित के मुद्दों की जगह पोस्टर और प्रतीकों पर राजनीति हावी होने लगे, तो असली सवाल पीछे छूट जाते हैं। कुंभलगढ़ में पोस्टर विवाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग में बदल गया है। आरोप-प्रत्यारोप, पलटवार और सोशल मीडिया की सियासत ने मामले को और उलझा दिया है। यदि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और तथ्य सामने आने चाहिए। वहीं, बिना ठोस प्रमाण के एक-दूसरे पर आरोप लगाना भी राजनीतिक माहौल को और विषाक्त बनाता है। नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता की प्राथमिकता रोजगार, शिक्षा, विकास और स्थानीय समस्याओं का समाधान है, न कि अंतहीन राजनीतिक टकराव। राजनीति का स्तर तभी ऊंचा माना जाएगा, जब बहस आरोपों पर नहीं, बल्कि समाधान पर केंद्रित होगी। जनता अब केवल बयान नहीं, बल्कि जिम्मेदार आचरण भी देखना चाहती है।



