
लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद। Kumbhalgarh Tiger Project कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में टाइगर लाने की प्रस्तावित योजना अब केवल वन एवं पर्यावरण का विषय नहीं रह गई है, बल्कि इस पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई है। एक ओर वन विभाग और स्थानीय पर्यटन से जुड़े लोग इस परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को ज्ञापन भेजकर योजना पर पुनर्विचार की मांग की है। सांसद के इस कदम के बाद परियोजना की गति धीमी पड़ती नजर आ रही है। इसी बीच कुंभलगढ़ विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुंभलगढ़ में टाइगर आकर रहेगा, किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। विधायक के इस बयान ने पूरे मामले को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
Kumbhalgarh Tiger Reserve : जानकारी के अनुसार सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने अपने ज्ञापन में लिखा था कि कुंभलगढ़ का वर्तमान पारिस्थितिक तंत्र (इकोसिस्टम) पहले से ही समृद्ध है और यहां तेंदुआ, भालू, भेड़िया, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, कैराकल तथा अन्य वन्यजीवों की अच्छी संख्या मौजूद है। उनका तर्क है कि टाइगर लाने से मौजूदा जैव विविधता और स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की पूर्व विशेषज्ञ समिति ने भी इस क्षेत्र की दीर्घकालीन क्षमता पर सवाल उठाए थे। हालांकि दूसरी ओर वन विभाग लंबे समय से कुंभलगढ़ को राजस्थान का अगला टाइगर रिजर्व बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। इस परियोजना को लेकर राज्य स्तर पर भी कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं। हाल ही में अलवर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में भी बाघों के पुनर्स्थापन और वैज्ञानिक आधार पर उनके संरक्षण को लेकर विस्तार से मंथन किया गया था।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कुंभलगढ़ टाइगर प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिल पाएगी, या सांसद के विरोध के बाद इस योजना में और विलंब होगा। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, NTCA की तकनीकी समिति ने अभी तक प्रस्ताव पर अंतिम अनुशंसा दर्ज नहीं की है, जिससे परियोजना की आगे की प्रक्रिया फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है। कुल मिलाकर कुंभलगढ़ का प्रस्तावित टाइगर प्रोजेक्ट अब पर्यावरण, पर्यटन, स्थानीय विकास और राजनीति—चारों के केंद्र में आ चुका है। आने वाले दिनों में सांसद, विधायक, वन विभाग और स्थानीय व्यापारिक संगठनों के रुख से ही तय होगा कि कुंभलगढ़ में बाघ की दहाड़ पहले सुनाई देगी या इस मुद्दे पर सियासत की आवाज और तेज होगी।

कारोबारियों ने भी उठाई मांग, प्रेस के समक्ष रखी बात
Mahima Kumari Mewar Tiger Project : कुंभलगढ़ क्षेत्र के होटल व्यवसायियों और व्यापारियों ने भी खुलकर टाइगर प्रोजेक्ट के समर्थन में मोर्चा संभाल लिया है। दो दिन पहले कुंभलगढ़ होटल एसोसिएशन की पहल पर स्थानीय व्यापारियों, पर्यटन व्यवसायियों और अन्य संगठनों की विशेष बैठक आयोजित हुई। साथ ही मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी। बैठक में सर्वसम्मति से कहा गया कि यदि कुंभलगढ़ में टाइगर प्रोजेक्ट लागू होता है तो इससे क्षेत्रीय पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। होटल उद्योग, गाइड, टैक्सी संचालकों, हस्तशिल्प व्यवसायियों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जल्द ही सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ से मिलकर परियोजना के पक्ष में अपना पक्ष रखा जाएगा और उनसे अपने विरोध पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया जाएगा।

विधायक का बयान आने से बढ़ी चर्चा
Kumbhalgarh MLA Surendra Singh Rathore : उधर विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ ने भी सार्वजनिक रूप से परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि कुंभलगढ़ में टाइगर जरूर आएगा और इसके लिए सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने लोगों से किसी भी प्रकार की आशंका नहीं रखने की अपील की। विधायक के इस बयान को परियोजना के समर्थन में स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में अब इस पूरे घटनाक्रम को केवल वन्यजीव संरक्षण के नजरिए से नहीं देखा जा रहा। सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ के अलग-अलग सार्वजनिक रुख के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेताओं के बयानों ने यह संकेत दिया है कि टाइगर प्रोजेक्ट को लेकर भाजपा के भीतर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत मतभेद की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में अंतर्कलह की चर्चाएं केवल राजनीतिक अटकलों तक सीमित हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
टाइगर से ज्यादा सियासत की दहाड़
Kumbhalgarh Tourism News : कुंभलगढ़ टाइगर प्रोजेक्ट अब केवल वन्यजीव संरक्षण या पर्यटन विकास का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक रस्साकशी का केंद्र बनता नजर आ रहा है। एक ओर राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने परियोजना पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा है, वहीं दूसरी ओर कुंभलगढ़ विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ का यह कहना कि “टाइगर आकर रहेगा”, दोनों जनप्रतिनिधियों के अलग-अलग रुख को सामने लाता है। इससे स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चाओं को बल मिला है। क्योंकि सांसद व विधायक एक ही दल के हैं। इसके बावजूद इस प्रोजेक्ट पर विचार एक दूजे से जुदा हैं, जबकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने भी इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के प्रयास किए थे। इस तरह लोकतंत्र में किसी भी विकास परियोजना पर अलग-अलग मत होना असामान्य नहीं है। यदि सांसद स्थानीय पर्यावरण, वन्यजीव संतुलन और ग्रामीण हितों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रही हैं तो यह उनका अधिकार है। वहीं यदि विधायक पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं को देखते हुए परियोजना के पक्ष में खड़े हैं, तो उसका भी अपना औचित्य है। लेकिन जब दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से अलग-अलग संदेश देते हैं, तो आमजन के बीच भ्रम की स्थिति बनना स्वाभाविक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मुद्दे को राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि टाइगर प्रोजेक्ट से पर्यावरण, स्थानीय आबादी और वन्यजीवों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है तो उसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं यदि विशेषज्ञ इसके विपरीत राय देते हैं, तो सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। कुंभलगढ़ जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र का भविष्य राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि संतुलित, पारदर्शी और वैज्ञानिक निर्णयों से तय होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता भी यही होनी चाहिए कि राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्र और जनता के दीर्घकालिक हितों को सर्वोच्च स्थान दिया जाए।



