
Devendra Kumar Karnawat : राजसमंद। स्वतंत्रता सेनानी एवं गांधी सेवा सदन के संस्थापक देवेन्द्र कुमार कर्णावट की स्मृति में देवेन्द्र पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। समारोह में नगर के प्रमुख कवि एवं साहित्यकार अफजल खां अफजल को देवेन्द्र पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। उन्हें ताम्र प्रशस्ति पत्र, शॉल, साहित्य सामग्री एवं 21 हजार रुपए का चेक भेंट किया गया।
सम्मान ग्रहण करते हुए अफजल खां अफजल ने कहा कि सुखी, शिक्षित और विकसित राजसमंद का सपना देखने वाले देवेन्द्र काका अजातशत्रु थे। राजसमंदवासी उन्हें स्नेह से काका कहकर पुकारते थे। उन्होंने सभी धर्म और सम्प्रदायों का सम्मान किया और समाज में आपसी सद्भाव को मजबूत करने का काम किया। अफजल ने देवेन्द्र काका से जुड़ी पुरानी स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि 1965-66 में काका ने उन्हें प्रोत्साहित किया था। नौ चौकी में आयोजित किसान सम्मेलन में उन्होंने अफजल की पहली कविता ‘हमारा प्यारा राजस्थान’ सुनी और उन्हें गांधी सेवा सदन बुलाकर उनकी कविताओं को विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करवाने में सहयोग किया। उन्होंने बताया कि करीब 60 वर्ष पहले जब उनके घर पर कोई पानी पीना भी पसंद नहीं करता था, तब देवेन्द्र काका ईद के दिन उनके घर आते और आत्मीयता से कहते थे- “अफजल, ईद की सवैयां-खीर खिलाओगे?” काका का उनके घर आकर खीर खाना और उन्हें सम्मान देना उनके जीवन की ऐसी स्मृति है, जिसने उन्हें देवेन्द्र काका और अणुव्रत के विचारों के करीब ला दिया।
शिक्षा क्रांति में देवेन्द्र काका का योगदान
अफजल ने कहा कि गांधी सेवा सदन के माध्यम से देवेन्द्र काका ने राजसमंद क्षेत्र में सामाजिक एवं शैक्षणिक क्रांति की नींव रखी। शुरुआती दौर में काका और कार्यकर्ताओं ने गांवों में लालटेन की रोशनी में शिक्षा का उजाला फैलाकर व्यक्ति निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि आज भी बाल निकेतन इसी उद्देश्य के साथ कार्य कर रहा है और केवल अंक आधारित शिक्षा के बजाय विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों का विकास किया जा रहा है। देवेन्द्र पुरस्कार से सम्मानित होना उनके लिए गौरव का विषय है।
तीन विद्यार्थियों को देवेन्द्र बाल प्रतिभा पुरस्कार

समारोह में बाल निकेतन के विद्यार्थी विराट पायक, ध्रुव खंडेलवाल और समरवीर सिंह चौहान को देवेन्द्र बाल प्रतिभा पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। विराट पायक को 10 हजार रुपए तथा ध्रुव खंडेलवाल और समरवीर सिंह चौहान को 5-5 हजार रुपए की सम्मान राशि के साथ ताम्र प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।

‘गांधी सेवा सदन के कण-कण में हैं काका’
गांधी सेवा सदन के उपाध्यक्ष मधुसूदन व्यास ने कहा कि देवेन्द्र काका आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन गांधी सेवा सदन के कण-कण में उनकी विचारधारा और कर्मों की छाप मौजूद है। राजसमंद में शिक्षा का जो उजाला फैला है, उसमें उनके प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान है। संस्था के ट्रस्टी गुणसागर कर्णावट, कार्यकारी अध्यक्ष ललित बड़ोला, डूंगरसिंह कर्णावट, उपाध्यक्ष गणपत धर्मावत एवं मधुसूदन व्यास ने अफजल खां अफजल को ताम्र प्रशस्ति पत्र, शॉल, साहित्य एवं 21 हजार रुपए का चेक भेंट कर देवेन्द्र पुरस्कार 2026 से अलंकृत किया।
स्वतंत्रता आंदोलन में भी निभाई अहम भूमिका

संस्था उपाध्यक्ष गणपत धर्मावत ने कहा कि देवेन्द्र काका महात्मा गांधी और बाल मनोवैज्ञानिक गिज्जु भाई के विचारों से प्रेरित थे। उन्होंने गांधी सेवा सदन की स्थापना कर राजसमंद में बाल शिक्षा को नई दिशा दी और मानवीय मूल्यों से युक्त पीढ़ी तैयार करने का प्रयास किया।
संस्था ट्रस्टी डूंगरसिंह कर्णावट ने स्वतंत्रता आंदोलन और अणुव्रत के क्षेत्र में देवेन्द्र काका के योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि आजादी से पहले देवेन्द्र काका रातभर जागकर अपने हाथों से दीवार समाचार पत्र तैयार करते और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर लगाते थे, ताकि लोगों में स्वतंत्रता प्राप्ति की भावना मजबूत हो।
गीत और काव्य प्रस्तुति ने बांधा समां
देवेन्द्र कुमार कर्णावट की 20वीं पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष ललित बड़ोला ने की। कार्यक्रम में बाल संगायकों ने अणुव्रत गीत और राष्ट्रभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। राजेश पाल ने सम्मान प्राप्तकर्ताओं का परिचय कराया, जबकि चावली चौधरी ने इतिहास प्रस्तुति के साथ काव्यमय संयोजन किया।



