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Death of freedom fighter Madanmohan Somtiya : आजादी का गजब था जज्बा, 6 माह तक रहे जेल

Jaivardhan News November 10, 2024 1 minute read

Death of freedom fighter Madanmohan Somtiya : देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने वाले राजसमंद जिले के आखिरी स्वतंत्रता सेनानी मदनमोहन सोमटिया का रविवार सुबह 7.15 बजे आखरी सांस ली। परिजनों का दावा है कि सोमटिया शतायु पार है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में उम्र कम बताई जा रही है। मेवाड़ प्रजामंडल के यौद्धा सोमटिया मूलत: नाथद्वारा शहर के रहने वाले हैं, जो लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले दो सप्ताह से नाथद्वारा के श्री गोवर्धन राजकीय जिला चिकित्सालय में भर्ती थी। उन्हें दिल की बीमारी व सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इलाज के दौरान ही रविवार सुबह निधन हो गया। सोमटिया राजसमंद जिले के आखरी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिनका भी निधन हो गए।

Freedom Fighter in Rajsamand District : नाथद्वारा के मध्यम परिवार में रामकृष्ण जाट व नानकी बाई के घर जन्मे सोमटिया 11 भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उनके दो बड़े भाई नरेंद्रपाल चौधरी व राजेन्द्र सिंह चौधरी भी स्वतंत्रता सेनानी थे। सोमटिया के पुत्र योगेश कुमार चौधरी ने बताया कि उनके पिता आजादी की लड़ाई में कई बार जेल गए थे। अप्रैल 1938 में मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना हुई थी। उस वक्त उनकी उम्र करीब 15 वर्ष थी, लेकिन आजादी की ऐसी दीवानगी थी कि वे अपने बड़े भाईयों के साथ स्वतंत्रता के आंदोलन का हिस्सा बन गए। फिर कई बार ब्रिटिश शासन की ओर से प्रताड़ित किए और गिरफ्तार हुए और जेल भी गए, लेकिन उनके आजादी आंदोजन के इरादें कमजोर नहीं हुए। सोमटिया ने अपने छात्र जीवन के दौरान प्रजामंडल आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे नाथद्वारा के मॉडर्न स्कूल में पढे, जो उस समय स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध था। 12-13 साल की छोटी उम्र में भी वे प्रजामंडल आंदोलन के कट्टर समर्थक थे और घर घर जाकर और जन जागरण कर इसके लिए सक्रिय रूप से प्रचार करते थे। आंदोलन में भाग लेने के लिए बहुत कम उम्र के होने के बावजूद वे निर्भीक होकर 21 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने तिरंगे के साथ एक जुलूस का नेतृत्व किया, स्वतंत्रता के गीत गाए और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नारे लगाए, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। तब करीब छह माह तक जेल में रहे। जमानत पर रिहा होने के बाद भी उन्होंने अपनी आजादी आंदाेलन में भागीदारी जारी रखी और 25 अगस्त 1942 को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया और 15 दिनों के लिए उदयपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। हालांकि, आगामी परीक्षाओं के कारण उनके सहित कई छात्रों को रिहा कर दिया गया था। जेल अधिकारियों ने उन्हें अमानवीय यातनाएं दीं, जिसमें मारपीट व भूखा रखना शामिल था। जब उन्होंने भूख हड़ताल की तो उन्हें बिना भोजन के बैरक में बंद कर दिया गया था। बताया जाता है कि 1938 से 1942 तक वे कई बार पकड़े गए, लेकिन हर बार उन्हें बालक समझ कर छोड़ दिया गया। पहली बार वे 1942 में दो बार भारत छोड़ो आंदोलन में 6 माह तक जेल में रहे।

Freedom Fighter in Nathdwara : जन्म तारीख को लेकर असमंजस

Freedom Fighter in Nathdwara : हालांकि उनकी जन्म तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति है। परिजनों का दावा है कि मदनमोहन सोमटिया का जन्म 14 सितम्बर 1922 हुआ, जबकि कुछ जगह रिकॉर्ड में 13 मार्च 1925 को भी जन्म होना बताया जाता है। इस तरह सरकारी रिकॉर्ड में भी विरोधाभास की बात सामने आई। खैर यह कोई मायने नहीं रखता कि जन्म तारीख क्या है, उनका देश के लिए व आजादी के लिए योगदान अतुलनीय रहा, जो आम जनमानस के लिए प्रेरणास्पद है।

नरोत्तम चौधरी ने किया था विक्टोरिया मूर्ति का मुंह काला

स्वतंत्रता सेनानी नरोत्तम चौधरी के पुत्र बाबूलाल चौधरी ने बताया कि वर्ष 1942 में आंदोलन को तेज करने के लिए उदयपुर के गुलाब बाग में स्थित रानी विक्टोरिया की मूर्ति का मुंह काला करने की योजना बनाई। इसके लिए सोमटिया के बड़े भाई राजेन्द्र सिंह व नरोत्तम चौधरी को चुना गया। वे साइकिल पर उदयपुर के गुलाब बाग पहुंचे और विक्टोरिया की मूर्ति का मुंह काला कर भूमिगत हो गए थे। उस घटना के बाद कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई, जिसमें मदनमोहन सोमटिया को भी पकड़ लिया था।

आजादी में योगदान पर कई हुए हो चुके सोमटिया सम्मानित

मदनमोहन सोमटिया को आजादी आंदोलन में योगदान के लिए कई बार शासन, प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं द्वारा उनका सम्मान किया गया। पहली बार 2 अक्टूबर 1987 को ताम्र पत्र मिला था। फिर 14 सितंबर 2000 को उनके जन्मदिन पर ताम्रपत्र से सम्मनित किया था। इसी तरह 14 मई 2009 को उप राष्ट्रपति भैरूसिंह शेखावत ने उनके निवास पर पहुंचकर उन्हें सम्मनित किया था। वर्ष 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी उन्हें सम्मनित किया। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस पर उल्लेखनीय कार्य के लिए कई बार उन्हें सम्मानित किया गया, ताकि अन्य लोग भी देश के प्रति जुड़ाव व देशभक्ति की भावना जाग्रत हो सकें। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी उनके निवास पर पहुंचकर उनका सम्मान कर चुके हैं।

Contribution in freedom movement : स्कूल के लिए दान दी जमीन

Contribution in freedom movement : स्वतंत्रता सेनानी सोमटिया ने राष्ट्रीय मॉर्डन विद्यापीठ की भूमि को स्वर्गीय स्वतंत्रता सैनानी नरेन्द्रपाल चौधरी की स्मृति में राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल के लिए दान में दे दी। इसके लिए भी सोमटिया का सम्मान किया गया। सोमटिया के साथ उनके भाईयों में भी देशभक्ति अटूट थी और अन्य लोगों को भी इसके लिए हमेशा प्रेरित करते थे।

सेंट्रल जेल के रजिस्टर में दर्ज है रिकॉर्ड

मदनमोहन सोमटिया विद्यार्थी काल से ही प्रजामण्डल आन्दोलन से जुड़ गए थे। कांग्रेस महासमिति के बम्बई अधिवेशन में 6 अगस्त 1942 को शामिल हुए, जहां महात्मा गांधी ने रियासती प्रजामण्डल के अध्यक्षों की उपस्थिति में अग्रेज भारत छोड़ो का नारा दिया और करो या मरो का आह्वान किया था। इसके तहत 25 अगस्त 1942 ई. को नाथद्वारा में अन्य छात्रों के साथ निकाले सत्याग्रह जुलूस में शामिल होने पर मदनमोहन सोमटिया को गिरफ्तार हुए थे, तब केन्द्रीय कारागृह उदयपुर में करीब 6 माह तक जेल में रखा। सेन्ट्रल जेल उदयपुर के रजिस्टर में क्रमांक 3582 पर उनका नाम दर्ज है।

राजकीय सम्मान से किया अंतिम संस्कार

स्वतंत्रता सेनानी मदनमोहन सोमटिया का अंतिम संस्कार नाथद्वारा स्थित शमशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया। शमशान घाट पर पुलिस की टीम ने उन्हें सलामी दी। जिसके बाद मदन मोहन सोमटिया के पुत्र योगेश सोमटिया ने मुखाग्नि दी। इससे पूर्व उनके निवास स्थान पर जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा, उपखंड अधिकारी रक्षा पारीक, तहसीलदार अजय अमरावत, पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी व अन्य अधिकारीयों ने उन्हें पुष्पचक्र भेंट कर श्रद्धांजलि अर्पित की ।
इसके साथ ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़ व सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ की ओर से भी प्रतिनिधियों द्वारा पुष्पचक्र अर्पित किए गए। पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवकीनंदन गुर्जर ने बताया कि मदन मोहन सोमटिया जी आजादी लड़ाई में कई बार जेल गए थे, उन्होंने अपने बड़े भाइयों की प्रेरणा से स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और देश को आजादी दिलाने में योगदान दिया, आज उनके निधन से नाथद्वारा ही नहीं पूरे मेवाड़ को एक अपूर्णीय क्षति हुई हैं। वहीं पालिकाध्यक्ष मनीष राठी, कांग्रेस नगर अध्यक्ष दिनेश एम जोशी, भाजपा नगर अध्यक्ष प्रदीप काबरा व पुर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष रमेश जैन,पार्षद विश्वास प्रजापत,पुर्व युवा जिलाध्यक्ष युवराज सिंह चौधरी,नगर कांग्रेस उपाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा,प्रवक्ता विशाल उपाध्याय,महासचिव उमेश शर्मा व अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की व अंत्येष्टि में सम्मिलित हुए।

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