Skip to content
May 14, 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Threads
  • Linkedin
  • Youtube
  • Instagram
jaivardhannews.com

jaivardhannews.com

Jaivardhan news

Nai Jindagi education Foundation

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Threads
  • Linkedin
  • Youtube
  • Instagram
Primary Menu
  • Home
  • तकनीकी
    • ऑटो
    • मोबाइल
  • क्राइम/हादसे
    • अजब गजब
  • फाइनेंस
    • बैंक
    • कमाई टिप्स
    • सोना चांदी भाव
  • मौसम
    • स्वास्थ्य
  • बायोग्राफी
  • सरकारी योजना
    • शिक्षा
    • खेल
    • भर्ती
  • विविध
    • देश-दुनिया
    • इतिहास / साहित्य
    • Jaivardhan TV
  • राशिफल
    • धार्मिक
    • दिन विशेष
  • वेब स्टोरी
  • Privacy Policy
  • इतिहास / साहित्य

kallaji rathore life : कल्लाजी राठौड़ के जीवन के रोचक तथ्य : Kalla Ji rathore Interesting facts

Jaivardhan News September 27, 2021 1 minute read

राजस्थान के प्रसिद्ध लोक देवता वीर वर श्री कल्लाजी राठौड़ के नाम से कई भारतवासी परिचित हैं। कल्लाजी का जन्म का विक्रम संवत 1601 में राजस्थान प्रान्त के मेड़ता नगर में हुआ था। इनके पिताजी सामियाना जागीर के राव श्री अचलसिंहजी थे। भक्तिमती मीरा बाई का जन्म भी आपके के ही कुल में हुआ था। वह कल्लाजी की बुआ लगती थी। वीरवर कल्लाजी बड़े प्रतिभा सम्पन्न रणबांकुरे योद्धा हुये है। कहते है इनकी माता श्वेत कुंवर ने शिव पार्वती के आशीर्वाद से उन्हे प्राप्त किया था। इनका जन्म का नाम केसरसिंह था।

Kallaji Rathod की शिक्षा

श्री कल्लाजी ने अश्वारोहण, खडग संचालन, तीर कबाण, ढाल, भाला आदि शस्त्र संचालन में निपुणता पाई। युद्ध कौशल घात – प्रतिघातों में कौशल अर्जित किया साथ ही क्षत्रिय धर्म शिक्षा से भी आत्मसात किया। वीरत्व और नेतृत्व के गुणों से वे अपने साथियों का सिरमौर कहे जाने लगे। उनके शस्त्र संचालन की नैसर्गिक प्रतिभा से उनके पराक्रम का प्रकाश विधुतीय गति से फैलने लगा। जिसे सुनकर ताऊजी एवं बड़ी माता को अपरिमित संतोष का अनुभव हुआ। किन्तु नवरोजे में डोला जा रहा था जिस पर अपनी भावज से जानकारी चाही भावज के मधुर उपालंभ सुन क्रोध में आकर कल्लाजी ने मारवाड़ से प्रस्थान का फैसला किया था।

kallaji rathore का मारवाड़ से प्रस्थान

कुंवर कल्लाजी अपनी युवावस्था के प्रारम्भ में अकबर द्वारा थोपी गई कुप्रथाओं का विरोध में मारवाड़ छोड़ मेवाड़ जाने का फैसला करते है। कल्लाजी ने माँ मरुधरा जननी व भाभी को अंतिम प्रणाम कर अश्वारूढ़ हो वायु वेग से मेवाड़ की तरफ प्रस्थान किया। कुंवर कल्लाजी अपने मित्रों और सजातीय बंधुओं के लिए प्राण समान थे। उनके गृह त्याग के समाचार सुन भ्राता तेजसिंह एवं मित्र रणधीरसिंह, विजयसिंह ने अपने साथियों सहित कल्लाजी के मार्ग पर निकल गयें। इस प्रकार मार्ग में अनुज तेजसिंह मित्र रणधीरसिंह, विजयसिंह सहित साथी कल्लाजी से आ मिले। इस प्रकार सभी वीर मेवाड़ की तरफ बढने लगे।

veer kallaji rathore का मेवाड़ में स्वागत

धन्य जननी जनम्यो कुंवर कल्ला राठौड़
आन बान पर घर छोड्यो, आयो गढ़ चित्तौड़।

इस प्रकार कल्लाजी व उनके मित्र मेवाड़ की वीर भूमि चित्तौड़गढ़ पहुँचते है। तब चित्तौड़ के राणा उदयसिंह व काका जयमलजी ने मिल कर कल्लाजी व अनुज तेजसिंह मित्र रणधीरसिंह, विजयसिंह सहित अन्य साथीयों का मेवाड़ की पावन भूमि पर स्वागत किया। सेनापति जयमल ने आगे बढ़कर कल्लाजी को गले लगा दिया। कल्लाजी ने काका जी के चरण स्पर्श किये। इस अवसर पर राणा उदयसिंह के द्वारा कल्लाजी के शौर्ये, पराक्रम एवं स्वाभिमान को देखकर कल्लाजी को मेवाड़ राज्य के छप्पन परगना रनेला में शांति कायम करने हेतु व सुचारू रूप से शासन हेतु रनेला का जागीरदार घोषित किया।

Maharana Pratap Facts in hindi : महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े रोचक तथ्य, Interesting life Story

kallaji rathore ki aarti : प्रथम दर्शन (कृष्ण कान्ता)

श्री कल्लाजी अपने भाई तेजसिंह व साथीयों सहित अपनी नवीन राजथानी रनेला की ओर प्रस्थान किया। जब कल्लाजी का यह दल वागड़ आ पंहुचता है। तब तेज वर्षा के कारण कल्लाजी व उनके साथीयों ने शिवगढ़ जो की वागड़ राज्य के राव कृष्णदास चौहान की राजकुमारी कृष्णकान्ता के निमंत्रण पर महल में रात्रि विश्राम किया। यही पर कल्लाजी का राजकुमारी कृष्णकान्ता से और तेजसिंह का कृष्णदास के अनुज रामदास की कन्या चपला से प्रथम मिलन हुआ । प्रातः राजकुमारियों ने कुंवरो को विदा किया और क्षत्रिय परम्परा के अनुसार सोमेश्वर महादेव तक पंहुचाने गयी। यही से रनेला की सीमा प्रारम्भ होती है।
की शिव शंकर रे देवरे, कल्ला दीदी धीज।
कृष्णा वेलो आवसू, सावणिया री तीज।।

kallaji rathore history : नवीन राजधानी रनेला में राज्याभिषेक

कुंवर कल्लाजी राठौड़ व उनके साथियों ने वागड़ से विदा लेकर नवीन राजधानी रनेला में प्रवेश किया। रनेला में ग्रामवासियों की भीड़ कल्लाजी व उनके साथियों के दर्शन व स्वागत हेतु उमड़ पड़ी। कल्लाजी का मधुर गीतों और ढोल व नगाड़ो की आवाज के मध्य राज्यभिषेक हुआ। कल्लाजी ने अपने राज्य में शांति कायम करने हेतु रनेला की आमदनी में बचत व राज्य की सुरक्षा से संबंधित दृढ़ व्यवस्था का कार्य किया। कल्लाजी अपने राज्य की जनता का दुःख दर्द प्रतिदिन सुनते एवं उसका निवारण करने लगे। उस वक्त रनेला के पास भौराई तथा टोकर पालों में दस्युओं ने आतंक फैला रखा था। इनका नेता गमेती पेमला था। दस्युओं ने पड़ोसी गांवों की जनता का धन, अन्न, पशुधन की चोरी एवं कन्याओं का अपहरण कर ले जाते थे जिसे भौराई गढ़ में बन्दी बनाकर देह शोषण किया जाता था।

veer kallaji rathore : भौराई गढ़ फतह

एक दिन डाकूओं ने रनेला क्षेत्र से करीब दो सौ गाय – बैल आदि चुरा कर कर भाग गए। कल्लाजी ने जब दुःखी जनता का वृतान्त सुना तब कल्लाजी ने अपनी मर्यादाओं को ध्यान में रख कर व्यकितगत रूप से पेमला को समझाने हेतु पत्रवाहक के रूप में विजयसिंह को भौराई गढ़ भेजा लेकिन पेमला नही माना। शूरवीर कल्लाजी ने अपने राज्य की जनता को पेमला के आतंक से मुक्त कराने के लिए भौराई गढ़ पर सेना सहित चढाई कर ली। इस युद्ध में स्वयं कल्लाजी, तेजसिंह, विजयसिंह, रणधीरसिंह सहित कई रनेला वासियों ने भाग लिया। इस युद्ध में स्वयं कृष्णकांता वीर वेष धारण कर बहिन चपला सहित सेना के साथ लड़ाई लड़ रही थी। कल्लाजी के सेनापति रणधीरसिंह ने पेमला सिर धड़ से अलग कर दिया। लगभग 4000 दस्यु और 500 राजपूतों की बलि लेकर रणचण्डी की तृप्ति हुई। इस प्रकार कल्लाजी ने अपने राज्य की प्रजा की पेमला दस्यु से रक्षा की। भौराई गढ़ विजय के फलस्वरूप महाराणा उदयसिंह के द्वारा कल्लाजी को भौराई और टोकर क्षेत्र व सेनापति रणधीरसिंह को पेमला को सिर काटने के लिये राठौड़ा ग्राम पुरुस्कार स्वरूप दिया गया। इस प्रकार कल्लाजी ने छप्पन धरा के राव की उपाधि धारण की।

गुरु भेरवनाथ के दर्शन

भौराई गढ़ विजय के अवसर पर कुंवर कल्लाजी अपने अनुज तेजसिंह के साथ सोम नदी के किनारे घूमने निकले थे। कल्लाजी व अनुज तेजसिंह प्रकृति का रमणीय सौन्दर्य को निहारते दोनों अश्वारोही होकर भगवान सोमनाथ के दर्शन कर कुछ ही दूर गये थे की पास की पहाड़ी पर उन्हें एक गुफा दिखाई दी। इस गुफा में कल्लाजी व तेजसिंह ने भीतर जाकर देखा की एक परम तेजस्वी एवं अलौकिक सिद्ध पुरुष श्री भैरवनाथजी अग्नि की धुनी के सामने विराजमान है। कल्लाजी व भ्राता तेजसिंह ने योगिराज भैरवनाथ को प्रणाम किया। भैरवनाथ ने कल्लाजी को देखकर बताया की आप योग विधा के योग्य हो। इसके लिए आप को कठोर साधना करनी होगी। इस प्रकार कल्लाजी अकेले आकर प्रतिदिन गुफा में गुरु भैरवनाथ से योग की शिक्षा ग्रहण करने लगे। गुरु भैरवनाथजी की कृपा से कल्लाजी एक परम तेजस्वी योगिराज हुये। और गुरु की कृपा से कल्लाजी ने भविष्य दर्शन की कला सीखी। इस कला के फलस्वरूप कल्लाजी अपने जीवन की भावी घटनाओं की जानकारी जान लेने पर भी उसे सहज भाव से स्वीकारा।

Kallaji Rathor Marriage : कल्लाजी का विवाह

कुंवर कल्लाजी रनेला की शासन व्यवस्था को सम्भालने के कारण व्यस्थ हो जाते है। जिस से कृष्णकांता कल्लाजी के पत्र, संदेश, समाचार तथा मिलन के अभाव से चिंतित तथा उदास रहती है। जब कृष्णदास को राजकुमारी की चिंता और उदास का राज पता चला तो कृष्णदास ने कुंवर कल्लाजी को राजकुमारी के योग्य समझते हुये कल्लाजी को सम्बन्ध का श्रीफल भेजा। कुंवर कल्लाजी ने श्रीफल स्वीकार किया।
कुछ समय पश्चात ही कुंवर कल्लाजी विवाह की निश्चित तिथि के दिन विवाह के लिए बारातियों सहित शिवगढ़ प्रस्थान किया। कुंवर कल्लाजी दूल्हें की वेशभूषा धारण कर, सिर मोड़ बांध कर, ढोल नगाडों की धूम के साथ अश्व पर सवार होकर बारात शिवगढ़ लेकर पहुचते है। जब तोरण के मंगलमय समय पर रनेलाधीश कल्लाजी तोरणोच्छेद के लिए तलवार उठाते है। तभी मेवाड़ से सैनिक रण निमंत्रण लेकर आता है। और कहता है की चितौड़ पर अकबर ने विशाल सेना के साथ आक्रमण कर दिया है। चितौड़ पर संकट है। महाराणा और राव जयमल ने मेवाड़ की रक्षा के लिये युद्ध में तुरंत बुलाया है। शूरवीर कल्लाजी ने महाराणा का बीड़ा ग्रहण कर कर्तव्य, स्वाभिमान और मातृभूमि की पुकार सुन तोरण पर उठी तलवार पुन: खींच, वैभव, सुख, रूपसी राजकुमारी के ब्याह को छोड़ कल्लाजी राजकुमारी कृष्णकांता से वरमाला ग्रहण कर राजकुमारी को पुनः आकर मिलने का वचन देकर सेना सहित चित्तौड़ प्रस्थान करते है।

घोसुण्डा की लड़ाई

शूरवीर कल्लाजी राठौड़ अपनी सेना सहित चित्तौड़ की ओर बढने लगे। घोसुण्डा गांव के समीप मुगलों से इनकी मुठभेड़ हो जाती है। इस घामासान लड़ाई को लड़ते – लड़ते वीर कल्लाजी की सेना चितोड़ की तरफ बढने लगी। कुछ आगे जाने पर उनकी भेंट जयमल के छोटे भाई ईश्वरदास राठौड़ से होती है। वे 2000 वीरों के साथ चितौड़ पर बलिदान हेतु जा रहे थे। परस्पर एकनिष्ठ देश भक्तों को देख कल्लाजी व ईश्वरदास ने मिलकर चित्तौड़ की ओर बढ़ने लगे और चित्तौड़गढ़ पहुंचते है।

     जयमलजी को वीर कल्लाजी व ईश्वरदास के चित्तौड़ आने का संदेश प्राप्त होते ही अर्द्ध रात्रि को किले का दरवाजा खोल दिया था। किले के निकट आसिफ खाँ ने मोर्चा लिया था वहीं पर शाही सैनिकों ने उन्हें रोका। श्री कल्लाजी ने उनसे लड़ते – लड़ते रणधीरसिंह से कहा की इन्हें रोकना सेनापति रणधीरसिंह 500 सैनिकों सहित इनसे लड़ते – लड़ते वीरगति प्राप्त होते है। और वीर कल्लाजी शेष सेना सहित किले में प्रवेश कर दिया।   

रणधीर रण में जूझियो, एक पडंता चार ।
शीश दिया चित्रकोट पर कर मुगलो रो संहार ।।

Kumbhalgarh Fort Instresting History : चीन के बाद कुंभलगढ़ में दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार

कल्ला जी राठौड़ की कथा : सुर शिरोमणी कल्लाजी का चित्तौड़ रक्षार्थ युद्ध

अकबर के आक्रमण की सूचना महाराणा उदयसिंह को युद्ध से पूर्व उनके पुत्र शक्तिसिंह से प्राप्त हो गई थी। जिस कारण महाराणा उदयसिंह ने बदनोर राव जयमल मेड़तिया को दुर्गाध्यक्ष और सेनाध्यक्ष नियत कर दुर्ग की रक्षा का सम्पूर्ण भार उन्ही को सौंप महाराणा उदयसिंह कुंभलगढ़ के सुरक्षित महलों में चले गये। शूरवीर कल्लाजी अपनी सेना सहित चित्तौड़ दुर्ग में आकार सेनाध्यक्ष जयमल से मिले। दुर्गरक्षक वीर जयमल इनके आगमन पर अत्यन्त प्रसन्न हुए और वीर कल्लाजी को अपने साथ दुर्ग की रक्षा के लिए नियुक्त कर दिया। वीरवर कल्ला, जयमल, पत्ता और ईश्वरदास आदि अपने प्राणों का मोह छोड़ कर अपनी दोनों भुजाओं से तलवार चलाते हुए देशभक्त, शूरवीर, सैनिकों एवं क्षत्रियों के साथ शत्रुदल पर भूखे शेर की भांति महाकाल बन कर टूट पड़े। जब बादशाह ने देखा की किला आसानी से प्राप्त नही होगा तो उसने सुरंगे और साबात (यानी जमीन में ढ़के हुए मार्ग जिससे सेना किले की दीवार तक पहुंच सके) बनवाना आरम्भ किया। सुरंगे तलहटी तक पहुंच गई और उनमे 80 मन और दूसरी में 120 मन बारूद भरी गई। इनके छुटने से किले का बुर्ज उड़ गया और कई योद्धा हताहत हुए। परन्तु अब तक अकबर को युद्ध में सफलता नही मिली, अकबर के सैनिकों ने कई जगह किले की दीवारें तोड़ दी, परन्तु राजपूतों ने पुनः बना ली।

कल्ला जी राठौड़ का इतिहास : राव जयमल की जांघ में गोली लगना

अकबर की सेना के बार – बार तोपों के आक्रमण से किले की कई दीवारें टूट चुकी थी। एक रात्रि जयमल टूटी हुई प्राचीर की मरम्मत मशाल की रोशनी में करा रहे थे, तब अकबर ने मशाल की रोशनी को देख अपनी “संग्राम” नामक बन्दुक से निशाना साध कर गोली चला दी, जिसकी गोली राव जयमलजी की जांघ में लगी जिससे जयमल घायल होकर चलने लायक नही रह सके। दुर्ग में सेनाध्यक्ष जयमल के घायल होने से शोक की लहर छा गयी।

कल्लाजी राठौड़ किसका अवतार है ?

कल्ला जी राठौड़ आश्विन शुक्ल अष्टमी, सामियाना गांव, जिला नागौर, राजस्थान में जन्म हुआ। वे एक राजपूत योद्धा थे, जिन्हें लोक देवता माना जाता है। ये मेड़ता के राव जयमल के छोटे भाई आसासिंह के पुत्र थे। इन्होंने मेवाड़ के लिए महाराणा प्रताप के साथ अकबर से युद्ध किया था।

तीसरा जौहर व शाका

रात्रि में सभी क्षत्रिय व क्षत्राणियों ने एकत्र होकर शाही फौज का बढता हुआ दबाव, दुर्ग में गोला बारूद की कमी, भोजन की कमी और सेनाध्यक्ष के घायल होने कारण जौहर और शाका का फैसला किया। तारीख 24 फरवरी 1568 को 13000 राजपूत रमणियो और कुमारियों ने गंगा जल का पान कर, चन्दन लेप लगाकर और अपने परिजनों को अंतिम बार मिल कर गीता सार का स्मरण कर हिन्दू धर्म की रक्षा के लिये हँसते – हँसते जौहर की अग्नि में समर्पित हो गई। क्षत्रीयों ने दुर्ग के गौमुख में स्नान कर केसरिया बाना धारण कर गंगा जल का पान कर, सुंगधित इत्र का छिड़काव कर व गीता पाठ सुन दो हाथों में तलवार धारण कर विशाल प्रांगन में एकत्रीत हुए।

वीर कल्लाजी राठौड़ का इतिहास : कसूंबा पान

बड़े हर्ष और उमंग के साथ चित्तौड़ के साहसी योद्धाओं ने केशरिया वस्त्र धारण कर अमल पान किया। सेनाध्यक्ष राव जयमल ने सरदारों को अमल पान कराया। सेनाध्यक्ष के अन्तिम मनुहार को चित्तौड़ की सेना ने बड़े प्रेम और सत्कार से स्वीकार किया। अब राजपूतों के उत्साह की कोई सीमा न रही। इस युद्ध में घायल सेनापति जयमल को लड़ते – लड़ते युद्ध में वीरगति प्राप्त करने की इच्छा थी। लेकिन गोली जयमल की जांघ में लगी थी। युद्ध करना तो दूर वे चलने – फिरने से भी मजबूर हो गये थे। तब वीर शिरोमणी कल्लाजी राठौड़ ने काका जयमल जी की पीड़ा को दूर करने के किये अपनी पीठ पर बैठा कर युद्ध करने का फैसला किया।

किले के विशाल कपाट को खोलना

25 फरवरी 1568 की सुबह राजपूतों व क्षत्रियों ने दो हाथों में तलवार धारण कर और नर नाहर शूरवीर राठौड़ रणबंकेश श्री कल्लाजी अपनी दोनों हाथों में भवानी धारण कर 60 साल के काका जयमल जी को अपनी पीठ पर बैठा कर उनके दोनों हाथों में भवानी धारण करा कर मुगलों सेना पर भूखे शेर की तरह किले के विशाल कपाट खोल आक्रमण कर दिया। क्षत्रियों ने जय एकलिंगनाथ, जय महादेव के नारों के साथ कई मुगलों को मार डाला वही श्री कल्लाजी व वीरवर जयमल जी का चतुर्भुज रूप रणभूमि में कही भी गुजरता वही को शत्रु सेना का मैदान साफ हो जाता। यह देख शत्रु सेना मैदान छोड़ भाग जाती थी।

मतवाले हाथी छोड़ना

बादशाह अकबर ने मुगल सेना को रणक्षेत्र से पीछे हटते देख राजपूतों पर मतवाले खूनी हाथियों को छोड़ दिया। अकबर ने अपने विशाल हाथियों की सूंड़ो में तलवारें की झालरें और दुधारे खांडे बंधवाई। मधुकर हाथी को सर्वप्रथम आगे बढ़ा कर पीछे जकिया, जगना, जंगिया, अलय, सबदलिया, कादरा आदि हाथी को बढ़ा दिया। इन हाथियों ने राजपूतों का घोर संहार करना आरम्भ कर दिया, लेकिन वीर क्षत्रिय राजपूतों कहा मानने वाले थे। वे भीषण गर्जना कर विशालकाय हाथियों पर खड्ग लेकर टूट पड़ते।

“बढ़त ईसर बाढ़िया बडंग तणे बरियांग
हाड़ न आवे हाथियां कारीगरां रे काम”

इस बीच कई राजपूतों ने मतवाले हाथियों से लड़ते – लड़ते वीरगति प्राप्त की। जिसमे से वीर ईश्वरदास ने असंख्य हाथियों का संहार कर मातृभूमि के चरणों में बलिदान दिया। वही महापराक्रमी पत्ता सिसोदिया रामपोल पर एक हाथी ने उन्हें पकड़ कर जमीन पर जोर से पटक दिया। वही पत्ता सिसोदिया ने वीरगति प्राप्त की।

डॉ. राकेश तैलंग
वरिष्ठ साहित्यकार व पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी
श्री द्वारकाधीश मंदिर मार्ग, कांकरोली
राजसमंद

About the Author

Jaivardhan News

Administrator

जयवर्द्धन न्यूज डेस्क टीम। पांच से 15 वर्ष तक पत्रकारिता के अनुभवी एक्सपर्ट शामिल है, जो प्रत्येक कंटेंट का गहन अवलोकन के बाद मौजूदा स्थिति के अनुसार बेहतर, निष्पक्ष, सारगर्भित व पठनीय कंटेंट तैयार करते हैं। Jaivardhan News Desk Team

Visit Website View All Posts
Visitor Views : 761

Post navigation

Previous: Engineering Students : इंजीनियरिंंग स्टूडेंट्स ने बांस से बनाई दुनिया की 100 फीसदी इको-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक कार
Next: विश्व विरासत कुंभलगढ़ का प्रथम प्रवेश द्वार से पर्यटक अनजान

Related Stories

Eklingji Temple history
  • इतिहास / साहित्य

Eklingji Temple history : महाराणा प्रताप के आराध्य देव, जानिए एकलिंगजी मंदिर का रहस्य

Parmeshwar Singh Chundwat May 13, 2026
Chittorgarh fort history in hindi
  • इतिहास / साहित्य

Chittorgarh fort history in hindi : भारत का सबसे वीर किला! चित्तौड़गढ़ का इतिहास सुनकर कांप उठेंगे दुश्मन

Parmeshwar Singh Chundwat May 11, 2026
khatu shyam mandir history
  • इतिहास / साहित्य
  • धार्मिक

khatu shyam mandir history : महाभारत से जुड़ा राजस्थान का रहस्यमयी मंदिर, यहां सच्चे मन से मांगी हर मन्नत होती है पूरी

Parmeshwar Singh Chundwat May 10, 2026
  • Poltical
  • Web Stories
  • अजब गजब
  • इतिहास / साहित्य
  • ऑटो
  • कमाई टिप्स
  • क्राइम/हादसे
  • खेल
  • तकनीकी
  • दिन विशेष
  • देश-दुनिया
  • धार्मिक
  • फाइनेंस
  • बायोग्राफी
  • बैंक
  • बॉलीवुड
  • भर्ती
  • मोबाइल
  • मौसम
  • राशिफल
  • विविध
  • शिक्षा
  • समाचार
  • सरकारी योजना
  • सोना चांदी भाव
  • स्वास्थ्य

Jaivardhan TV

YouTube Video UCkaBxhzSvuqEmluN5aAXxtA_wp23akiBTq8 राजसमंद में 3 दिन में 2 हार्डकोर, 6 ईनामी समेत 46 आरोपी गिरफ्तार #rajsamandpolice
#jaivardhannewsराजसमंद शहर से लेकर नाथद्वारा, आमेट, देवगढ़ सहित जिलेभर में 9 से 12 मई तक विशेष अभियान के तहत 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिला पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल ने बताया कि पुलिस ने विशेष धरपकड़ अभियान के तहत 2 हार्डकोर व 6 ईनामी आरोपी भी पकड़े हैं, जिसमें नाथद्वारा व देवगढ़ थाना पुलिस की अहम भूमिका रही।
राजसमंद न्यूज
Rajsamand police
Rajsamand News
nathdwara news
Devgarh news
Rajasthan policeOwner : Laxman Singh Rathor, Senior JournalistFacebook Page : Jaivardhannews9
Facebook Page : Liverajsamand
Website: https://jaivardhannews.com
X : jaivardhannews
Instagram : jaivardhannews
Theards : jaivardhannews
Business Inquiry Email : businessjaivardhannews@gmail.com
Mobile : 9672980901
जयवर्द्धन E Paper (PDF) के लिए वेबसाइट विजिट jaivardhannews.comकिसी भी वीडियो से किसी व्यक्ति को आघात पहुंचाना ध्येय नहीं है। फिर भी कोई ऐसी तथ्यात्मक त्रुटि या गलती लगे, तो तत्काल ई मेल व कॉल करें। उचित सुधार व समाधान के प्रयास किए जाएंगे।
राजसमंद में 3 दिन में 2 हार्डकोर, 6 ईनामी समेत 46 आरोपी गिरफ्तार #rajsamandpolice
#jaivardhannewsराजसमंद शहर से लेकर नाथद्वारा, आमेट, देवगढ़ सहित जिलेभर में 9 से 12 मई तक विशेष अभियान के तहत 46 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिला पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल ने बताया कि पुलिस ने विशेष धरपकड़ अभियान के तहत 2 हार्डकोर व 6 ईनामी आरोपी भी पकड़े हैं, जिसमें नाथद्वारा व देवगढ़ थाना पुलिस की अहम भूमिका रही।
राजसमंद न्यूज
Rajsamand police
Rajsamand News
nathdwara news
Devgarh news
Rajasthan policeOwner : Laxman Singh Rathor, Senior JournalistFacebook Page : Jaivardhannews9
Facebook Page : Liverajsamand
Website: https://jaivardhannews.com
X : jaivardhannews
Instagram : jaivardhannews
Theards : jaivardhannews
Business Inquiry Email : businessjaivardhannews@gmail.com
Mobile : 9672980901
जयवर्द्धन E Paper (PDF) के लिए वेबसाइट विजिट jaivardhannews.comकिसी भी वीडियो से किसी व्यक्ति को आघात पहुंचाना ध्येय नहीं है। फिर भी कोई ऐसी तथ्यात्मक त्रुटि या गलती लगे, तो तत्काल ई मेल व कॉल करें। उचित सुधार व समाधान के प्रयास किए जाएंगे।
राजसमंद में 3 दिन में 2 हार्डकोर, 6 ईनामी समेत 46 आरोपी गिरफ्तार #rajsamandpolice
राजसमंद की महिलाओं और युवाओं के लिए शानदार अवसर | Nai Jindagi foundation #naijindagifoundation  #jaivardhannews
#rajsamand
राजसमंद की महिलाओं और युवाओं के लिए शानदार अवसर 🎉📍 नई जिंदगी एजुकेशन एंड वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा
निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण के साथ अब GDA Nursing, Computer और Finance Skills Training भी शुरू।अगर आप रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और बेहतर करियर की तलाश में हैं, तो यह मौका आपके लिए है। 💼✨✅ Free सिलाई प्रशिक्षण
✅ GDA Nursing Training
✅ RS-CFA & RSCIT Certification Program
✅ Computer + Finance Skills
✅ 4 महीने का प्रोफेशनल कोर्स
✅ 100% Practical Training
✅ Multiple Government Recognized Certificates
✅ Job Support Available
✅ ₹18,000 तक Free Benefits👩 महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण
💻 Computer Skills
🏥 GDA Nursing Training
📈 सीखें हुनर और बनाएं शानदार करियर📍 पता:
नई जिंदगी एजुकेशन एंड वेलफेयर फाउंडेशन
जलचक्की चौराहा, IDBI बैंक के ऊपर, राजसमंद📞 Contact Numbers:
70231-36617
77421-86617
70735-36617#Naijindagifoundation #FreeTailoringTraining #GDANursing #NursingCourse #RSCIT #ComputerCourse #FinanceCourse #Rajsamand #WomenEmpowerment #SkillDevelopment #JobSupport #JaivardhanNews #todaynews
Owner : Laxman Singh Rathor, Senior JournalistFacebook Page : Jaivardhannews9
Facebook Page : Liverajsamand
Website: https://jaivardhannews.com
X : jaivardhannews
Instagram : jaivardhannews
Theards : jaivardhannews
Business Inquiry Email : businessjaivardhannews@gmail.com
Mobile : 9672980901
जयवर्द्धन E Paper (PDF) के लिए वेबसाइट विजिट jaivardhannews.comकिसी भी वीडियो से किसी व्यक्ति को आघात पहुंचाना ध्येय नहीं है। फिर भी कोई ऐसी तथ्यात्मक त्रुटि या गलती लगे, तो तत्काल ई मेल व कॉल करें। उचित सुधार व समाधान के प्रयास किए जाएंगे।
राजसमंद की महिलाओं और युवाओं के लिए शानदार अवसर | Nai Jindagi foundation #naijindagifoundation
नाथद्वारा शहर में आधी रात किसने तोड़ी, 24 दिन हो गए, सिस्टम पर उठे सवाल ? #nathdwaranews  #jaivardhannews
#rajsamandराजसमंद जिले के नाथद्वारा शहर में आइकॉनिक गेट के पास आधी रात में दुकानों में जेसीबी से तोड़फोड़ की गई। चन्द्रभान सिंह चौधरी पुत्र बाबूलाल चौधरी ने श्रीनाथजी थाने में रिपोर्ट दी। पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया और अनुसंधान शुरू किया, मगर अभी तक आरोपियों का पता नहीं चल सका। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि जेसीबी के साथ जो भी लोग आए, वे सभी घटना स्थल के आस पास में लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों में कैद हैं। फिर पुलिस त्वरित जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार क्यों नहीं कर कर रही है। बीस से ज्यादा दिन बीतने पर भी कार्रवाई नहीं होने पर राजसमंद में बाबूलाल चौधरी ने जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा को ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग उठाई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदित्य प्रताप सिंह चौहान द्वारा भी पीड़ित के समर्थन में कलक्टर से कार्रवाई की मांग की। पीड़ित की मांग पर कलक्टर ने जांच अधिकारी बदलने के निर्देश दिए हैं। देखिए दुकान में तोड़फोड़ को लेकर पीड़ित बाबूलाल चौधरी क्या कहते हैं, सुनिए
Nathdwara News
Rajsamand News
JaivardhanNewsOwner : Laxman Singh Rathor, Senior JournalistFacebook Page : Jaivardhannews9
Facebook Page : Liverajsamand
Website: https://jaivardhannews.com
X : jaivardhannews
Instagram : jaivardhannews
Theards : jaivardhannews
Business Inquiry Email : businessjaivardhannews@gmail.com
Mobile : 9672980901
जयवर्द्धन E Paper (PDF) के लिए वेबसाइट विजिट jaivardhannews.comकिसी भी वीडियो से किसी व्यक्ति को आघात पहुंचाना ध्येय नहीं है। फिर भी कोई ऐसी तथ्यात्मक त्रुटि या गलती लगे, तो तत्काल ई मेल व कॉल करें। उचित सुधार व समाधान के प्रयास किए जाएंगे।
नाथद्वारा शहर में आधी रात किसने तोड़ी, 24 दिन हो गए, सिस्टम पर उठे सवाल ? #nathdwaranews
Subscribe

वेब स्टोरी

  • Facebook
  • Twitter
  • Threads
  • Linkedin
  • Youtube
  • Instagram
Go to mobile version