
Petrol Diesel Rate Hike News : देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। हालांकि दूसरी ओर इस फैसले से सरकारी तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से बढ़ते कच्चे तेल के दामों के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन कीमतें स्थिर रखी गई थीं, जिसके कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां लगातार बढ़ती लागत और नियंत्रित खुदरा कीमतों के बीच फंसी हुई थीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही थीं, लेकिन घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम लंबे समय तक नहीं बढ़ाए गए। इसका सीधा असर कंपनियों की कमाई पर पड़ा और उनकी अंडर-रिकवरी तेजी से बढ़ती चली गई। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि से तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी में करीब ₹52,700 करोड़ की कमी आने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत तेल कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी, क्योंकि इससे उनके वित्तीय दबाव में काफी हद तक कमी आएगी। रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2026-27 में तेल कंपनियों को होने वाले कुल अनुमानित घाटे का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ इस बढ़ोतरी से कम हो जाएगा। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि कंपनियां पिछले कई महीनों से कितने बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रही थीं।
रोजाना ₹1000 करोड़ तक का हो रहा था नुकसान
Fuel Price Increase 2026 : सरकारी अनुमानों के अनुसार कीमतों में बदलाव से पहले तक सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ रहा था। यदि इसे सालाना आधार पर देखा जाए तो यह नुकसान लगभग ₹3.6 लाख करोड़ तक पहुंच रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने के बावजूद घरेलू ईंधन कीमतों को लंबे समय तक स्थिर रखना कंपनियों के लिए भारी पड़ रहा था। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी करना लगभग अनिवार्य हो गया था।

आम आदमी पर बढ़ेगा महंगाई का असर
SBI Report Fuel Price Hike :हालांकि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की जरूरतों के सामान भी महंगे हो सकते हैं। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने के कारण फल-सब्जियां, दूध, राशन और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने की आशंका जताई जा रही है। एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर मई और जून 2026 के दौरान खुदरा महंगाई पर दिखाई देगा। रिपोर्ट के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर में करीब 15 से 20 बेसिस पॉइंट्स तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से एसबीआई ने पूरे वित्त वर्ष के लिए महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है।
कीमत बढ़ने के बाद भी तेल की खपत कम नहीं होगी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद देश में ईंधन की कुल खपत में बहुत बड़ी गिरावट आने की संभावना नहीं है। पुराने आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि कीमतें बढ़ने के तुरंत बाद कुछ समय के लिए खपत में हल्की कमी जरूर आती है, लेकिन धीरे-धीरे उपभोग फिर सामान्य स्तर पर पहुंच जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में परिवहन और दैनिक जरूरतों के लिए ईंधन पर निर्भरता इतनी ज्यादा है कि लोग मजबूरी में बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल जारी रखते हैं।
पहले सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर दी थी राहत
Fuel Inflation India News : इससे पहले केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की थी। उस फैसले के कारण सरकार को करीब ₹1.1 लाख करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि तेल कंपनियों को पूरी तरह राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी को शून्य कर दिया जाए तो केंद्र सरकार को करीब ₹1.9 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है। वहीं राज्यों को भी लगभग ₹80,000 करोड़ के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार के सामने संतुलन बनाने की चुनौती
Crude Oil Price Impact : विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम जनता को राहत देने और तेल कंपनियों को आर्थिक रूप से स्थिर बनाए रखने के बीच संतुलन कायम करना है। एक तरफ बढ़ती ईंधन कीमतें महंगाई को बढ़ावा देती हैं, वहीं दूसरी तरफ कीमतें नियंत्रित रखने से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ता है। ऐसे में आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सरकार की नीतियों पर सबकी नजर बनी रहेगी।



