
Rajasthan solar electricity : राजस्थान में तेजी से बढ़ रही सौर ऊर्जा (Solar Energy) अब अवसर के साथ-साथ चुनौती भी बनती जा रही है। प्रदेश, जो देश में Solar Power Production का बड़ा केंद्र माना जाता है, वहां अब बिजली उत्पादन जरूरत से ज्यादा होने लगा है। लेकिन विडंबना यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में सस्ती बिजली बनने के बावजूद आम उपभोक्ताओं तक इसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के फलोदी स्थित देश के सबसे बड़े भड़ला सोलर पार्क में अप्रैल के पहले पखवाड़े के दौरान करीब 47 लाख यूनिट सोलर बिजली बेकार चली गई। हालात ऐसे बने कि Solar Plants को कई बार अपना उत्पादन रोकना पड़ा। इस प्रक्रिया को तकनीकी भाषा में Curtailment कहा जाता है। इस खुलासे के बाद बिजली उपभोक्ताओं के बीच निराशा है, क्योंकि जिस Solar Power से सस्ती बिजली मिलने की उम्मीद थी, वही सिस्टम की कमियों के कारण बर्बाद हो रही है। बिजली कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल के पहले 15 दिनों में दिन के समय Solar Production जरूरत से काफी ज्यादा हो गया था। लेकिन Demand कम होने, Grid Capacity सीमित होने और Storage System की कमी के कारण अतिरिक्त बिजली का उपयोग नहीं हो सका। परिणामस्वरूप अलग-अलग दिनों में 15% से 64% तक सोलर उत्पादन रोकना पड़ा। इसका सीधा असर बिजली कंपनियों, प्लांट ऑपरेटर और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
3 बड़ी वजहें, जिनसे नहीं मिल सकेगी सस्ती बिजली
1. Grid Capacity की कमी
Rajasthan solar power news : राजस्थान में Solar Power तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उसके अनुरूप Transmission Infrastructure तैयार नहीं हो पाया। अतिरिक्त बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान या अन्य राज्यों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त Transmission Lines और Grid Network उपलब्ध नहीं हैं। यही वजह है कि उत्पादन होने के बावजूद बिजली सप्लाई नहीं हो पाती। विशेषज्ञों का कहना है कि Solar Expansion के साथ Grid Expansion पर भी समान गति से काम होना जरूरी है।
2. Battery Storage System नहीं
Solar Energy की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसका उत्पादन मुख्य रूप से दिन में होता है। दिन के समय बिजली की मांग कम रहती है, जबकि शाम और रात में Demand बढ़ जाती है। अगर अतिरिक्त बिजली को Store करने के लिए बड़े Battery Storage Systems उपलब्ध हों तो दिन में बनी बिजली बाद में इस्तेमाल की जा सकती है। लेकिन राजस्थान में अभी बड़े स्तर पर Energy Storage Infrastructure विकसित नहीं हो पाया है। इस वजह से अतिरिक्त बिजली को स्टोर करने की बजाय उत्पादन रोकना पड़ता है।
3. Demand और Supply में असंतुलन
दिन में Solar Production Peak पर होता है, लेकिन उस समय घरेलू और Commercial Demand अपेक्षाकृत कम रहती है। Load Management और Demand Forecasting में कमजोरी के कारण भी बिजली का संतुलन नहीं बन पाता। Discom Level पर Load Balancing System अभी पर्याप्त प्रभावी नहीं माना जा रहा। इसी कारण बड़ी मात्रा में बनी बिजली उपयोग से पहले ही बेकार हो जाती है।
तीन प्लांट में लाखों यूनिट बिजली का नुकसान
Solar electricity Rajasthan : रिपोर्ट के अनुसार तीन बड़े प्लांट में भारी मात्रा में बिजली बर्बाद हुई।
100 मेगावाट प्लांट
- प्रभावित बिजली: 16.19 लाख यूनिट
- अनुमानित नुकसान: 40 लाख रुपए
100 मेगावाट प्लांट
- प्रभावित बिजली: 15.50 लाख यूनिट
- अनुमानित नुकसान: 38 लाख रुपए
250 मेगावाट प्लांट
- प्रभावित बिजली: 15.50 लाख यूनिट
- अनुमानित नुकसान: 51 लाख रुपए
कुल मिलाकर करोड़ों रुपए की सस्ती बिजली का फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया।
अप्रैल के ये 7 दिन रहे सबसे ज्यादा Critical
Rajasthan electricity update : Curtailment Report के मुताबिक अप्रैल का पहला पखवाड़ा Solar Sector के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।
- 1 अप्रैल: सबसे कम Curtailment, केवल 15%
- 11 अप्रैल: सबसे ज्यादा Curtailment, 61%
खासकर 9 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच लगातार ज्यादा उत्पादन रोकना पड़ा। यही अवधि Solar Overflow की सबसे बड़ी चेतावनी बनकर सामने आई।
हर दिन बढ़ रही Solar Capacity
Cheap electricity Rajasthan : राजस्थान में हर दिन लगभग 10 से 12 मेगावाट नई Solar Capacity जुड़ रही है। प्रदेश Renewable Energy Hub के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर Storage, Grid और Demand Management पर तेजी से काम नहीं हुआ तो आने वाले समय में Solar Overflow Crisis और गंभीर हो सकता है।

क्या है समाधान?
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या का समाधान संभव है, लेकिन इसके लिए तेज और रणनीतिक कदम जरूरी हैं।
1. मजबूत Grid Infrastructure
नई Transmission Lines और Inter-State Connectivity बढ़ानी होगी।
इससे अतिरिक्त बिजली दूसरे राज्यों तक भेजी जा सकेगी।
2. Battery Storage Projects
बड़े स्तर पर Battery Energy Storage Projects तेजी से शुरू करने होंगे।
राजस्थान में फिलहाल 6000 मेगावाट-ऑवर Battery Storage Capacity विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
3. Time-of-Day Tariff लागू करना
दिन के समय उद्योगों और बड़े Commercial Consumers को सस्ती बिजली उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
इसके लिए Time-of-Day Tariff System प्रभावी हो सकता है, जिसमें निर्धारित समय पर बिजली उपयोग करने पर छूट मिलती है।
4. Green Hydrogen जैसे विकल्प
अतिरिक्त बिजली का उपयोग Green Hydrogen Production जैसे वैकल्पिक क्षेत्रों में किया जा सकता है।
इससे Renewable Energy Waste कम होगा और नई Economy विकसित हो सकेगी।
ऊर्जा मंत्री ने क्या कहा?
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि सौर ऊर्जा राजस्थान की ताकत है और आम जनता को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जल्द ही Battery Storage System विकसित किए जा रहे हैं ताकि Solar Curtailment की समस्या कम हो सके। सरकार ने 6000 मेगावाट Battery Storage System पर काम शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
राजस्थान डिस्कॉम्स के पूर्व CMD आर.जी. गुप्ता का कहना है कि Solar Production तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सिस्टम उसी गति से तैयार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सस्ती बिजली का इस तरह बेकार जाना बताता है कि Grid, Storage और Demand Management के बीच संतुलन की कमी है। अगर समय रहते Smart Load Management, Battery Storage और Green Hydrogen पर तेजी से काम नहीं हुआ तो भविष्य में यह आर्थिक संकट बन सकता है।



