
Bhim railway line demand : राजसमंद जिले का भीम उपखंड आज भी उस रेल सीटी की आस लगाए बैठा है, जिसकी आवाज देश के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुकी है। एक तरफ देवगढ़ और दूसरी तरफ ब्यावर वर्षों पहले रेलवे नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, लेकिन इनके बीच स्थित भीम आज भी रेल सुविधा से वंचित है।
आज़ादी के 75 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद भीम उपखंड रेलवे मानचित्र पर अपनी जगह नहीं बना पाया है। हालत यह है कि भीम से महज 40 किलोमीटर दूर रेल लाइन मौजूद है, लेकिन यहां रहने वाले लोगों को आज भी ट्रेन पकड़ने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। भीम राजसमंद जिले का सबसे बड़ा उपखंड मुख्यालय माना जाता है, इसके बावजूद यह क्षेत्र अब तक केवल सड़क मार्ग के भरोसे ही चल रहा है। स्थानीय लोग लगातार रेलवे कनेक्टिविटी की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। मगरा क्षेत्र के विकास को लेकर वर्षों से बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। योजनाएं भी बनीं, लेकिन रेल कनेक्टिविटी जैसी महत्वपूर्ण सुविधा आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी। नगर से करीब 40 किलोमीटर दूर देवगढ़ तक रेलवे लाइन पहले से मौजूद है और अब वहां ब्रॉडगेज का काम भी तेजी से चल रहा है। दूसरी तरफ लगभग 70 किलोमीटर दूर ब्यावर से ब्रॉडगेज रेल लाइन गुजरती है। ऐसे में स्थानीय लोगों का मानना है कि भीम को इन दोनों में से किसी एक रेल मार्ग से जोड़ना न तो बहुत महंगा है और न ही तकनीकी रूप से मुश्किल। यदि देवगढ़ से भीम होते हुए ब्यावर या हरिपुर तक रेल लाइन बिछा दी जाए, तो यह केवल भीम की समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर भी बन सकता है।
नाथद्वारा-देवगढ़ ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट पर 225 करोड़ खर्च
Rajsamand rail connectivity news : रेलवे विभाग ने वर्ष 2024-25 में नाथद्वारा से देवगढ़ तक रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए करीब 225 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया था। इस परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और रेलवे ने दिसंबर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना पूरी होने के बाद मावली से देवगढ़ मदारिया तक लगभग 99 किलोमीटर लंबा क्षेत्र रेल संपर्क से जुड़ जाएगा। हालांकि स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद भीम को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अब तक कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।
मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ सकता है यह रेल मार्ग
Nathdwara Deogarh broad gauge project : मावली-मारवाड़ मीटरगेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज में बदले जाने का काम पहले से जारी है। नाथद्वारा से देवगढ़ तक आमान परिवर्तन की प्रक्रिया भी चल रही है, लेकिन इसके आगे की दिशा अभी तक तय नहीं हो सकी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देवगढ़ से भीम होकर हरिपुर या ब्यावर तक रेल लाइन विकसित की जाए, तो यह मार्ग सीधे अजमेर और मारवाड़ की ब्रॉडगेज लाइन से जुड़ सकता है। इससे उदयपुर, राजसमंद, पाली, जोधपुर और आगे बीकानेर तक यात्रा अधिक आसान और तेज हो जाएगी। इसके अलावा नागौर, सीकर और झुंझुनूं क्षेत्र के लोगों को भी बेहतर रेल सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

धार्मिक और पर्यटन स्थलों को मिलेगा फायदा
Bhim subdivision railway news : नई रेल लाइन बनने से केवल यात्री सुविधा ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को भी नया विस्तार मिल सकता है।मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों से लेकर मारवाड़ और मेवाड़ के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों तक सफर आसान हो जाएगा। चारभुजा मंदिर, नवलखा पार्श्वनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में यात्रियों को बड़ी सुविधा मिल सकती है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
उद्योग और व्यापार को मिल सकता है बड़ा लाभ
Mewar Marwar rail corridor : रेल कनेक्टिविटी का फायदा केवल आम यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। यह क्षेत्र के उद्योग और व्यापार के लिए भी गेम चेंजर साबित हो सकता है। राजसमंद और किशनगढ़ के मार्बल उद्योग, कांकरोली के टायर उद्योग, पाली के कपड़ा उद्योग और मेहंदी व्यापार को सीधा फायदा मिल सकता है। वर्तमान में पाली और उदयपुर के बीच घाट सेक्शन होने के कारण सड़क मार्ग से माल परिवहन में अधिक समय और लागत लगती है। यदि रेल सुविधा उपलब्ध हो जाए तो माल ढुलाई तेज, सस्ती और अधिक सुविधाजनक हो सकेगी। साथ ही जोधपुर, जैसलमेर और उदयपुर के बीच पर्यटन गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिल सकती है।
व्यापारियों और लोगों ने उठाई रेल लाइन की मांग
स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि रेलवे लाइन की कमी के कारण भीम क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे रह गया है।इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी शौकत मोहम्मद का कहना है कि पिछले 75 वर्षों में रेल सुविधा के अभाव में भीम का अपेक्षित विकास नहीं हो सका। उनका मानना है कि रेल लाइन बनने से राजसमंद का मार्बल आसानी से ब्यावर और किशनगढ़ तक पहुंच सकेगा। व्यवसायी बाबूलाल टांक बताते हैं कि भीम और देवगढ़ मेवाड़-मारवाड़ के बीच महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। यहां के लोग व्यापार के लिए मुंबई, सूरत, गुजरात, बैंगलुरु और जोधपुर जैसे शहरों में यात्रा करते हैं, लेकिन ट्रेन पकड़ने के लिए उन्हें ब्यावर या मारवाड़ जंक्शन तक जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। व्यापार संघ अध्यक्ष बाबूलाल कोठारी ने बताया कि पिछले करीब 15 वर्षों से भीम को रेल लाइन से जोड़ने की मांग लगातार उठ रही है। उनका कहना है कि देवगढ़ मदारिया से भीम होकर हरिपुर तक रेल लाइन बनने से यह क्षेत्र सीधे मेवाड़ और मारवाड़ से जुड़ जाएगा। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राजू वैष्णव का कहना है कि रेल यात्रा आमजन के लिए सबसे सस्ती, आरामदायक और सुविधाजनक मानी जाती है। रेल सुविधा मिलने से न केवल यात्रियों को लाभ होगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों और माल परिवहन को भी नई दिशा मिलेगी।



