Skip to content
jaivardhannews.com

jaivardhannews.com

Jaivardhan news

Nai Jindagi education Foundation
Primary Menu
  • Home
  • ई-पेपर
  • ई-पत्रिका
  • तकनीकी
    • ऑटो
    • मोबाइल
  • क्राइम/हादसे
    • अजब गजब
  • फाइनेंस
    • बैंक
    • कमाई टिप्स
  • मौसम
    • स्वास्थ्य
  • बायोग्राफी
  • सरकारी योजना
    • शिक्षा
    • भर्ती
  • विविध
    • देश-दुनिया
    • इतिहास / साहित्य
    • Jaivardhan TV
  • धार्मिक
  • दिन विशेष
  • कानून
  • वेब स्टोरी
  • Privacy Policy
  • इतिहास / साहित्य

Mehrangarh Fort History In Hindi : 500 साल पुराने इस किले की रक्षा करती हैं चीलें! जानिए मेहरानगढ़ का रहस्य

Parmeshwar Singh Chundwat May 20, 2026 1 minute read

Mehrangarh Fort History In Hindi : राजस्थान की धरती अपने शौर्य, परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इन्हीं गौरवशाली विरासतों में शामिल है जोधपुर का भव्य मेहरानगढ़ किला, जो अपनी विशालता, अद्भुत स्थापत्य कला और रहस्यमयी कहानियों के कारण पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। नीले शहर जोधपुर की ऊंची पहाड़ी पर बना यह किला सिर्फ पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि राजपूताना गौरव, पराक्रम और लोकआस्था का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

करीब 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह दुर्ग दूर से ही अपनी भव्यता का एहसास करा देता है। कहा जाता है कि मेहरानगढ़ किले की दीवारें आज भी राजपूत वीरता की गाथाएं सुनाती हैं। इस किले के बारे में जितना इतिहास मशहूर है, उतनी ही चर्चित इससे जुड़ी रहस्यमयी मान्यताएं भी हैं। मेहरानगढ़ किले की स्थापना वर्ष 1459 में राठौड़ वंश के शासक राव जोधा ने की थी। दरअसल, राव जोधा पहले मंडोर से शासन करते थे, लेकिन सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से उन्होंने राजधानी को जोधपुर स्थानांतरित करने का फैसला लिया। इसके बाद भाऊचेरिया पहाड़ी पर इस विशाल दुर्ग की नींव रखी गई। ‘मेहरानगढ़’ नाम भी बेहद खास माना जाता है। ‘मेहरान’ का अर्थ सूर्य होता है और राठौड़ वंश खुद को सूर्यवंशी मानता था। यही वजह है कि किले का नाम सूर्य देवता के सम्मान में मेहरानगढ़ रखा गया। इतिहासकारों के अनुसार इस किले का वर्तमान स्वरूप कई शासकों के योगदान का परिणाम है। राव जोधा के बाद मालदेव, महाराजा अजीत सिंह, तखत सिंह और हनवंत सिंह जैसे शासकों ने समय-समय पर इसमें नए महल, द्वार और संरचनाएं बनवाईं।

किले के निर्माण से जुड़ी बलिदान की कहानी

Mehrangarh Fort haunted story : मेहरानगढ़ किले के निर्माण से जुड़ी एक बेहद भावुक और चर्चित कथा भी सुनाई जाती है। कहा जाता है कि किले की मजबूत नींव के लिए मानव बलि की आवश्यकता बताई गई थी। उस समय राजाराम मेघवाल नामक व्यक्ति ने स्वेच्छा से खुद को बलिदान के लिए प्रस्तुत किया था। आज भी स्थानीय लोग इस बलिदान को सम्मान के साथ याद करते हैं और इसे मेहरानगढ़ की नींव में बसे त्याग और समर्पण का प्रतीक मानते हैं।

ऋषि का श्राप और पानी की कमी की मान्यता

Mehrangarh Fort photos : किले के निर्माण के दौरान एक और कथा प्रचलित है। बताया जाता है कि जिस पहाड़ी पर किला बनाया गया, वहां चीरिया नाथजी नामक एक संत तपस्या करते थे। राव जोधा ने किले के निर्माण के लिए उन्हें वहां से हटने को कहा, जिससे नाराज होकर संत ने श्राप दिया कि इस क्षेत्र को हमेशा पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि बाद में राजा ने संत को मनाने के लिए मंदिर और आवास बनवाया। इसके बावजूद आज भी लोग इस कहानी को मेहरानगढ़ से जुड़ी रहस्यमयी मान्यताओं में शामिल करते हैं।

चीलों की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है यह किला

Mehrangarh Fort Interesting Facts : मेहरानगढ़ किले की सबसे अनोखी पहचान यहां हमेशा मंडराने वाली चीलें हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये चीलें मां दुर्गा का स्वरूप हैं और किले की रक्षा करती हैं। मारवाड़ के इतिहासकारों और लोक परंपराओं के अनुसार, मां करणी ने राव जोधा को आशीर्वाद दिया था कि जब तक मेहरानगढ़ के ऊपर चीलें उड़ती रहेंगी, तब तक इस दुर्ग पर कोई संकट नहीं आएगा। 1965 के भारत-पाक युद्ध से जुड़ी एक मान्यता भी यहां बेहद प्रसिद्ध है। लोगों का विश्वास है कि पाकिस्तान की ओर से दागे गए बम किले को नुकसान नहीं पहुंचा सके क्योंकि मां चामुंडा ने चील का रूप धारण कर किले की रक्षा की। यही कारण है कि आज भी यहां चीलों को चुग्गा डालने की परंपरा जारी है।

सात विशाल द्वारों से सजा है किला

Mehrangarh Fort Travel Guide : मेहरानगढ़ किला अपने विशाल और मजबूत प्रवेश द्वारों के लिए भी जाना जाता है। किले में कुल सात प्रमुख द्वार हैं, जिनमें जयपोल, फतेह पोल, भैरों गेट, डेढ़ कांगरा गेट, लोहा गेट और अन्य द्वार शामिल हैं। इन विशाल दरवाजों को इस तरह बनाया गया था कि दुश्मन सेना आसानी से अंदर प्रवेश न कर सके। आज भी इन दरवाजों पर युद्ध के निशान और इतिहास की झलक साफ दिखाई देती है।

महलों की खूबसूरती मोह लेती है मन

किले के अंदर बने महल अपनी बारीक नक्काशी और राजसी भव्यता के लिए मशहूर हैं। यहां मौजूद मोती महल, फूल महल, शीश महल और दौलत खाना पर्यटकों को खास आकर्षित करते हैं। मोती महल का निर्माण राजा सूर सिंह ने करवाया था। वहीं फूल महल को महाराजा अभय सिंह ने बनवाया था, जिसे शाही मनोरंजन स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। शीश महल अपनी शानदार कांचकारी और दर्पण सजावट के कारण सबसे ज्यादा चर्चित है। यहां की दीवारों और छतों पर बनी बारीक कलाकृतियां राजस्थानी शिल्पकला का बेहतरीन उदाहरण मानी जाती हैं।

किले के अंदर मौजूद हैं रहस्य और इतिहास

मेहरानगढ़ किले में दो प्रमुख महल—अकेला महल और बादल महल—भी बेहद खास माने जाते हैं। अकेला महल वह स्थान था जहां राजा अपने परिवार के साथ रहते थे। वहीं बादल महल को ‘आकाशीय महल’ कहा जाता है क्योंकि यह किले के सबसे ऊंचे हिस्से पर स्थित है। किले में एक संग्रहालय भी है, जहां पुराने हथियार, पेंटिंग्स, शाही पोशाकें, पालकियां और ऐतिहासिक दस्तावेज संरक्षित हैं। यहां आने वाले पर्यटक राजपूताना संस्कृति को बेहद करीब से महसूस कर सकते हैं।

हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों की पसंद

मेहरानगढ़ किला सिर्फ इतिहास प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि फिल्म निर्माताओं के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र रहा है। यहां कई बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। हॉलीवुड फिल्म The Dark Knight Rises और बॉलीवुड फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान समेत कई चर्चित फिल्मों के दृश्य इसी किले में फिल्माए गए हैं।

किले की वास्तुकला है अद्भुत

करीब 500 वर्षों में तैयार हुए इस किले की वास्तुकला राजपूत और मुगल शैली का खूबसूरत संगम दिखाई देती है। इसकी दीवारें लगभग 68 फीट चौड़ी और 117 फीट लंबी बताई जाती हैं। किले का बाहरी डिजाइन सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया था। यहां छिपी हुई सुरंगें, ऊंची प्राचीरें और मजबूत संरचनाएं दुश्मनों से रक्षा के लिए तैयार की गई थीं।

कब जाएं मेहरानगढ़ घूमने?

यदि आप मेहरानगढ़ किला घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे बेहतर माना जाता है। सर्दियों के मौसम में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है और पर्यटक आराम से पूरे किले का भ्रमण कर सकते हैं। सुबह के समय किले की खूबसूरती और भी ज्यादा आकर्षक दिखाई देती है।

प्रवेश शुल्क और समय

मेहरानगढ़ किला सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है। पर्यटक सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक यहां घूम सकते हैं। घरेलू पर्यटकों के लिए टिकट लगभग 100 रुपये है, जबकि छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को रियायत भी दी जाती है। विदेशी पर्यटकों के लिए अलग टिकट व्यवस्था मौजूद है।

जोधपुर का स्वाद भी है खास

मेहरानगढ़ घूमने के साथ अगर आप जोधपुर के मशहूर व्यंजनों का स्वाद नहीं लेते, तो यात्रा अधूरी मानी जाती है। यहां की मिर्ची बड़ा, प्याज कचौरी, मावा कचौरी और मखनिया लस्सी देशभर में प्रसिद्ध हैं। वहीं मिठाइयों में बेसन चक्की और मोतीचूर लड्डू पर्यटकों की पहली पसंद माने जाते हैं।

आसपास के पर्यटन स्थल भी हैं खास

मेहरानगढ़ किले के आसपास राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क, चोकेलो गार्डन, नागणेचजी मंदिर और चामुंडा माता मंदिर जैसे कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मौजूद हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, इतिहास और आस्था का संगम देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

आज भी जिंदा हैं परंपराएं

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मेहरानगढ़ किले में निर्माण कार्य कभी पूरी तरह बंद नहीं होता। कहा जाता है कि किले की स्थापना के समय से लेकर आज तक यहां किसी न किसी रूप में काम चलता रहता है। राजपरिवार आज भी कई पुरानी परंपराओं को निभाता है। चीलों को दाना डालने की परंपरा हो या मां चामुंडा की पूजा—मेहरानगढ़ आज भी इतिहास और आस्था को एक साथ संजोए हुए है।

Rajsamand Nata Pratha Case : ‘नाता प्रथा’ के नाम पर दूसरी शादी करने वाले पति को कोर्ट की फटकार

About the Author

Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

Visit Website View All Posts
Visitor Views : 114

Post navigation

Previous: SBI interest rates on FD : SBI में ₹3 लाख जमा कर बनें लाखपति! जानिए कितना मिलेगा पक्का रिटर्न
Next: PM SVANidhi Credit Card 2026 : अब बिना ब्याज मिलेगा ₹30 हजार तक का फायदा, छोटे व्यापारियों की हुई बल्ले-बल्ले

Related Stories

Shivnal Mahadev Temple
  • इतिहास / साहित्य

Shivnal Mahadev Temple : 5 हजार साल पुराना त्रिशूल! महाभारत काल का यह शिव मंदिर आज भी समेटे है अनगिनत रहस्य

Parmeshwar Singh Chundwat August 3, 2026
Maharana Pratap Haldighati
  • समाचार
  • इतिहास / साहित्य

Maharana Pratap Haldighati : इस मिट्टी से तिलक करो, ये धरती है बलिदान की… हल्दीघाटी और यहां की मिट्‌टी को नमन करते हैं लोग

Laxman Singh Rathor June 18, 2026
Fathers Day Special Article
  • इतिहास / साहित्य

Fathers Day Special Article : फादर्स डे पर हर बेटे-बेटी को पढ़नी चाहिए ये भावुक बात, दिल छू जाएगी कहानी

Parmeshwar Singh Chundwat June 11, 2026
  • Poltical
  • अजब गजब
  • इतिहास / साहित्य
  • ऑटो
  • कमाई टिप्स
  • कानून
  • क्राइम/हादसे
  • तकनीकी
  • दिन विशेष
  • देश-दुनिया
  • धार्मिक
  • फाइनेंस
  • बायोग्राफी
  • बैंक
  • बॉलीवुड
  • भर्ती
  • मोबाइल
  • विविध
  • शिक्षा
  • समाचार
  • सरकारी योजना
  • सोना चांदी भाव
  • स्वास्थ्य

Jaivardhan TV

राजसमंद में मंशापूर्ण गणेशजी मंदिर का अनोखा इतिहास और विश्वास #Ganeshchaturthi राजसमंद में मंशापूर्ण गणेशजी मंदिर का अनोखा इतिहास और विश्वास #Ganeshchaturthiराजसमंद शहर में नौचोकी पाल के नीचे मंशापूर्ण गणपति का भव्य मंदिर है। इसकी स्थापना राजसमंद के संस्थापक महाराणा राजसिंह द्वारा की गई। मान्य है कि यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता है।
Ganesh Mandir Rajsamand
Ganpati Mandir Rajsamand
Mansapurna mandir rajsamand
Rajsamand News
Ganesh Ji Temple
Ganesh ChaturthiJaivardhan News : यह चैनल राजस्थान सहित देश-दुनिया की ताजा, विश्वसनीय और निष्पक्ष खबरों के लिए समर्पित है।Owner & Editor: Laxman Singh Rathore (Journalist)🌐 Website: http://www.jaivardhannews.com
📘 Facebook: Jaivardhannews9
📸 Instagram: @jaivardhannews
🐦 X (Twitter): @jaivardhannews
📧 Business Email: businessjaivardhannews@gmail.com
📞 Mobile: +91 96729 80901सत्य • निष्पक्षता • जनहित
राजसमंद में मंशापूर्ण गणेशजी मंदिर का अनोखा इतिहास और विश्वास #Ganeshchaturthiराजसमंद शहर में नौचोकी पाल के नीचे मंशापूर्ण गणपति का भव्य मंदिर है। इसकी स्थापना राजसमंद के संस्थापक महाराणा राजसिंह द्वारा की गई। मान्य है कि यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता है।
Ganesh Mandir Rajsamand
Ganpati Mandir Rajsamand
Mansapurna mandir rajsamand
Rajsamand News
Ganesh Ji Temple
Ganesh ChaturthiJaivardhan News : यह चैनल राजस्थान सहित देश-दुनिया की ताजा, विश्वसनीय और निष्पक्ष खबरों के लिए समर्पित है।Owner & Editor: Laxman Singh Rathore (Journalist)🌐 Website: http://www.jaivardhannews.com
📘 Facebook: Jaivardhannews9
📸 Instagram: @jaivardhannews
🐦 X (Twitter): @jaivardhannews
📧 Business Email: businessjaivardhannews@gmail.com
📞 Mobile: +91 96729 80901सत्य • निष्पक्षता • जनहित
राजसमंद में मंशापूर्ण गणेशजी मंदिर का अनोखा इतिहास और विश्वास #Ganeshchaturthi
आमेट में निकली बाबा रामदेव की शोभायात्रा, विधायक राठौड़ हुए शामिल #babaramdev #rajsamandnewsराजसमंद जिले के आमेट शहर में बाबा रामदेव जयंती पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रेगर मोहल्ला बस स्टैंड से शोभायात्रा रवाना हुई, जो मुख्य लक्ष्मी बाजार, गणेश चौक, होलीथान होते हुए रामदेव मंदिर पहुंची। रथ पर बाबा रामदेवजी की झांकी सजी थी। आगे घोड़े और ऊंट पर सवार युवा और केसरिया पगड़ी में ढोल-नगाड़े के धूम धड़ाके पर भक्त चल रहे थे। जय बाबा री और बाबा रामदेव के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। व्यापारियों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। साथ ही जगह जगह पानी व फल का भी श्रद्धालुओं में वितरण किया गया। शोभायात्रा में कुंभलगढ़ विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ सहित कई लोग शामिल हुए।
baba ramdev Jayanti
Baba Ramdev mandir
ramdevji sobhayatra
Rajsamand News
amet news
Kumbhalgarh MLA Surendra Singh RathoreJaivardhan News : यह चैनल राजस्थान सहित देश-दुनिया की ताजा, विश्वसनीय और निष्पक्ष खबरों के लिए समर्पित है।Owner & Editor: Laxman Singh Rathore (Journalist)🌐 Website: http://www.jaivardhannews.com
📘 Facebook: Jaivardhannews9
📸 Instagram: @jaivardhannews
🐦 X (Twitter): @jaivardhannews
📧 Business Email: businessjaivardhannews@gmail.com
📞 Mobile: +91 96729 80901सत्य • निष्पक्षता • जनहित
आमेट में निकली बाबा रामदेव की शोभायात्रा, विधायक राठौड़ हुए शामिल #babaramdev
राजसमंद में रामदेव जयंती पर निकली शोभायात्रा #Rajsamandnews
#babaramdevराजसमंद शहर में भादवी बीज के उपलक्ष्य में कलालवाटी स्थित रामदेवजी मंदिर में विशेष पूजा अर्चना के बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सबसे आगे ऊंटगाड़ी साथ में ध्वजा लहरा रही थी।
Rajsamand News
Bhadvi Bij
Ramdev ji
Baba RamdevJaivardhan News : यह चैनल राजस्थान सहित देश-दुनिया की ताजा, विश्वसनीय और निष्पक्ष खबरों के लिए समर्पित है।Owner & Editor: Laxman Singh Rathore (Journalist)🌐 Website: http://www.jaivardhannews.com
📘 Facebook: Jaivardhannews9
📸 Instagram: @jaivardhannews
🐦 X (Twitter): @jaivardhannews
📧 Business Email: businessjaivardhannews@gmail.com
📞 Mobile: +91 96729 80901सत्य • निष्पक्षता • जनहित
राजसमंद में रामदेव जयंती पर निकली शोभायात्रा #Rajsamandnews #babaramdev
Subscribe

वेब स्टोरी

Angel wings Hospital Rajsamand
Angel wings Hospital Rajsamand

Recent Posts

  • iPhone 18 Pro Max price : भारत में ₹44 हजार तक महंगा iPhone 18 Pro, जानें कीमत और फीचर्स
  • Rajsamand election 2026 : राजसमंद में टूटा 20 साल का मतदान रिकॉर्ड! 81.19% वोटिंग ने बढ़ाई प्रत्याशियों की धड़कनें
  • Rajsamand municipal election result : सोमवार को खुलेगा राजसमंद के 251 प्रत्याशियों की किस्मत का राज, 8 बजे से मतगणना
  • Desuri Ghat route update : रामदेवरा जाने वालों के लिए बड़ी खबर, 25 सितंबर तक इस रास्ते पर भारी वाहन बंद
  • Gold price today : सोने-चांदी के दाम में फिर गिरावट, जानिए 10 ग्राम सोने और 1 किलो चांदी का रेट
| MoreNews by AF themes.