
राजसमंद। Rajsamand Zila Parishad History : पंचायतीराज व्यवस्था के तहत अस्तित्व में आई राजसमंद जिला परिषद का करीब तीन दशक का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। वर्ष 1991 में राजसमंद नया जिला बनने के बाद वर्ष 1995 में पहली बार जिला परिषद के चुनाव हुए। तब से अब तक जिला परिषद में 6 बार बोर्ड का गठन हो चुका है और इस दौरान 8 जिला प्रमुख पद पर रहे हैं।
जिला परिषद के राजनीतिक इतिहास में भाजपा का पलड़ा कांग्रेस से भारी रहा है। छह बोर्ड के गठन में चार बार भाजपा ने सत्ता संभाली, जबकि दो बार कांग्रेस का बोर्ड बना। वर्ष 1995 से 2020 तक के चुनावी सफर में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कई बार कांटे की टक्कर देखने को मिली। इसी राजनीतिक सफर में वर्ष 2009 का उपचुनाव सबसे अहम मोड़ साबित हुआ। उस समय भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद पार्टी को जिला प्रमुख की कुर्सी गंवानी पड़ी। जिला परिषद की 25 सीटों में भाजपा के पास 16 सदस्य थे, जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ 8 सदस्य थे। इसके बावजूद भाजपा के भीतर पैदा हुए असंतोष ने पूरा राजनीतिक समीकरण बदल दिया और कांग्रेस के नारायणसिंह भाटी जिला प्रमुख बनने में सफल रहे।
1995 में हरिओमसिंह राठौड़ बने पहले जिला प्रमुख
Rajsamand Zila Pramukh Election : पंचायतीराज व्यवस्था के तहत वर्ष 1995 में हुए राजसमंद जिला परिषद के पहले चुनाव में भाजपा के हरिओमसिंह राठौड़ जिले के प्रथम जिला प्रमुख बने। इसके बाद वर्ष 2000 में कांग्रेस की बसंता रावत ने जिला परिषद की कमान संभाली। वर्ष 2005 के चुनाव में भाजपा के नरेंद्रसिंह सोलंकी जिला प्रमुख चुने गए। हालांकि वर्ष 2007 में सड़क हादसे में उनके निधन के बाद जिला प्रमुख का पद रिक्त हो गया। इसके बाद तत्कालीन उप जिला प्रमुख नंदलाल सिंघवी ने कार्यवाहक जिला प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वर्ष 2009 में जिला प्रमुख पद के लिए उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस के नारायणसिंह भाटी ने जीत दर्ज कर जिला प्रमुख की कुर्सी हासिल की। वर्ष 2010 के चुनाव में कांग्रेस के किशनलाल भील जिला प्रमुख बने। इसके बाद वर्ष 2015 में भाजपा के प्रवेश सालवी और वर्ष 2020 में भाजपा की रतनीदेवी चौधरी ने जिला प्रमुख पद संभाला। इस तरह जिला परिषद के अब तक के सफर में भाजपा और कांग्रेस दोनों को जिला प्रमुख पद पर प्रतिनिधित्व मिला है। वहीं, बोर्ड गठन के लिहाज से भाजपा चार बार और कांग्रेस दो बार सत्ता में रही है। Rajsamand Zila Parishad BJP Congress

2009 में 16 सीटों का बहुमत बगावत के आगे पड़ा भारी
Rajsamand Panchayati Raj Election : वर्ष 2009 का जिला प्रमुख उपचुनाव राजसमंद जिला परिषद की राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में गिना जाता है। वर्ष 2005 के आम चुनाव में जिला परिषद की कुल 25 सीटों में भाजपा ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस के खाते में 8 सीटें आई थीं। यानी भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत था। जिला प्रमुख के चुनाव में जीत के लिए 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी था। ऐसे में 16 सदस्यों वाली भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन प्रत्याशी चयन के बाद पार्टी के भीतर बने असंतोष ने पूरा समीकरण बदल दिया। उस समय जिला प्रमुख का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित था। भाजपा ने ओबीसी वर्ग से गणेशदास को प्रत्याशी बनाया। इसे लेकर पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर उठने लगे। दूसरी ओर कांग्रेस ने सामान्य वर्ग से नारायणसिंह भाटी को अपना प्रत्याशी बनाया। संख्या बल में कांग्रेस भाजपा से काफी पीछे थी, लेकिन भाजपा के असंतुष्ट सदस्यों का समर्थन कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में चला गया। इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला और महज 8 सदस्यों वाली कांग्रेस के नारायणसिंह भाटी ने भाजपा के बहुमत वाले बोर्ड से जिला प्रमुख की कुर्सी छीन ली। Rajsamand Zila Parishad Political History
यह चुनाव राजसमंद जिला परिषद की राजनीति में इस बात का बड़ा उदाहरण बना कि सिर्फ संख्या बल ही सत्ता हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रत्याशी चयन और आंतरिक राजनीतिक समीकरण भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।



