
नाथद्वारा। Nathdwara Nagar Palika Election : नगर पालिका चुनाव के सभी 40 वार्डों के नतीजे सामने आने के बाद नाथद्वारा की राजनीति में नया रोमांच पैदा हो गया है। चुनाव परिणाम में भाजपा 20 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जबकि सत्ताधारी कांग्रेस को 19 वार्डों में जीत मिली। वहीं एक वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। 40 सदस्यीय नगर पालिका में बोर्ड बनाने के लिए 21 पार्षदों का बहुमत जरूरी है। ऐसे में भाजपा बहुमत के आंकड़े से महज एक सीट दूर है और वार्ड 22 से जीतने वाले निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश सनाढ्य की भूमिका बेहद अहम हो गई है।
प्रकाश सनाढ्य भाजपा के बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे। उन्होंने 61 वोट के अंतर से जीत हासिल करते हुए भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया। अब यही निर्दलीय पार्षद नाथद्वारा में अगला बोर्ड बनाने में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। नाथद्वारा नगर पालिका चुनाव में कई वार्डों के परिणाम बेहद दिलचस्प रहे। सबसे करीबी मुकाबला वार्ड 9 में देखने को मिला। यहां भाजपा की ज्योति कुमावत ने कांग्रेस की दीपिका कुमावत को महज 2 वोट के मामूली अंतर से हराया। इस वार्ड में करीब 94 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिसके बाद परिणाम को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई थी। इसी तरह वार्ड 33 में भी मुकाबला बेहद कांटे का रहा। यहां कांग्रेस के भव्य पारिख ने भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ 4 वोट के अंतर से मात दी। वहीं सबसे बड़ी जीत वार्ड 23 में दर्ज हुई। यहां कांग्रेस के अजय कुमार गुर्जर ने भाजपा के दिनेश प्रजापत को 487 वोट के भारी अंतर से शिकस्त दी। अजय कुमार गुर्जर को कुल 533 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी के खाते में महज 46 वोट आए। बड़े अंतर से जीत दर्ज करने वालों में कांग्रेस के श्यामलाल गुर्जर भी शामिल रहे। उन्होंने वार्ड 29 से 346 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ वे पांचवीं बार पार्षद चुने गए हैं।
भाजपा बहुमत से एक कदम दूर
Nathdwara Election Result : 40 वार्डों वाली नाथद्वारा नगर पालिका में भाजपा को 20, कांग्रेस को 19 और निर्दलीय को एक सीट मिली है। यानी भाजपा के पास सबसे अधिक पार्षद हैं, लेकिन बोर्ड बनाने के लिए उसे एक और वोट की जरूरत है। ऐसे में वार्ड 22 से जीते निर्दलीय प्रकाश सनाढ्य की राजनीतिक अहमियत अचानक बढ़ गई है। खास बात यह है कि सनाढ्य भाजपा के ही बागी उम्मीदवार थे। उन्होंने चुनाव में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। अब देखना यह होगा कि बोर्ड गठन के दौरान निर्दलीय पार्षद किसका साथ देते हैं। उनके समर्थन से भाजपा आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 19 सीटें हैं और बहुमत से वह दो सीट दूर है। ऐसे में कांग्रेस के सामने भी राजनीतिक समीकरण साधने की चुनौती होगी।

कांग्रेस के तीन बड़े चेहरों को झटका
Nathdwara Chairman Election : नाथद्वारा के चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए कई मायनों में झटका देने वाले रहे। पार्टी के तीन प्रमुख चेहरों को अपने-अपने वार्ड में हार का सामना करना पड़ा।
वार्ड 21 में कांग्रेस के पूर्व चेयरमैन मनीष राठी चुनाव हार गए। यह वार्ड राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का गृहवार्ड है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने भी इसी वार्ड में अपना वोट डाला था। ऐसे में उनके गृह क्षेत्र में पार्टी के पूर्व चेयरमैन की हार ने कांग्रेस के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसके अलावा वार्ड 18 में कांग्रेस नगर अध्यक्ष दिनेश एम. जोशी को भी हार का सामना करना पड़ा। वहीं वार्ड 14 से कांग्रेस के रमेश राठौड़ चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सके। तीन प्रमुख नेताओं की हार को कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। चुनाव परिणाम ने पार्टी के स्थानीय संगठन और जमीनी पकड़ को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।
दिग्गजों के गढ़ में हार ने बढ़ाई चिंता
Nathdwara Municipal Election Result : मनीष राठी की हार का असर नाथद्वारा की स्थानीय राजनीति पर दिखाई देना तय माना जा रहा है। जिस वार्ड 21 को कांग्रेस के लिए मजबूत क्षेत्र माना जाता था, वहीं पूर्व चेयरमैन को हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि यह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का गृहवार्ड भी है। ऐसे में इस परिणाम को केवल एक पार्षद की हार के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब निर्दलीय के हाथ में सत्ता की चाबी
नगर पालिका में चेयरमैन का चुनाव निर्वाचित पार्षदों के जरिए होता है। बोर्ड बनाने के लिए किसी दल को कुल सीटों के आधे से एक अधिक, यानी स्पष्ट बहुमत की जरूरत होती है। नाथद्वारा में कुल 40 सीटें हैं, इसलिए बहुमत का आंकड़ा 21 है। भाजपा 20 सीटों के साथ इस आंकड़े से सिर्फ एक कदम दूर है। कांग्रेस 19 सीटों के साथ भाजपा से एक सीट पीछे है और बहुमत से दो सीट दूर है। ऐसे में एकमात्र निर्दलीय पार्षद प्रकाश सनाढ्य के पास सत्ता की चाबी पहुंच गई है। अब नाथद्वारा की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि निर्दलीय पार्षद किसके साथ खड़े होंगे और नगर पालिका की चेयरमैन की कुर्सी पर किसका कब्जा होगा?
चुनाव परिणाम के बाद अब सबकी निगाहें बोर्ड गठन और चेयरमैन चुनाव पर टिक गई हैं। भाजपा के सामने जहां बहुमत जुटाने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस अपने 19 पार्षदों के साथ समीकरण बदलने की कोशिश कर सकती है। आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक जोड़-तोड़ नाथद्वारा की नई नगर पालिका सरकार की तस्वीर साफ करेगी।



