
Rajsamand municipal elections : राजसमंद जिले में पहली बार पांचों नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ होने जा रहे हैं। ऐसे में मुकाबला केवल वाडों में पार्षद चुनने या बोर्ड बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। इन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की राजनीतिक पकड़, संगठन की ताकत और स्थानीय प्रभाव का भी इम्तिहान होगा।
जिले की चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। इसलिए राजसमंद, नाथद्वारा, आमेट, देवगढ़ और भीम में बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी विधायकों की प्रतिष्ठा से जुड़ गई है। नाथद्वारा में कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के सामने भी पुराने राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखने की चुनौती है। पिछले निकाय चुनाव में राजसमंद नगर परिषद और नाथद्वारा नगर पालिका में कांग्रेस के बोर्ड बने थे। आमेट में भी भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ अपनी पार्टी का बोर्ड नहीं बना पाए थे और कांग्रेस ने सत्ता संभाली थी। उस समय प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने का राजनीतिक फायदा भी पार्टी को मिला था। वहीं देवगढ़ में भीम विधायक हरिसिंह रावत भाजपा का बोर्ड बनाने में सफल रहे थे। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार है और जिले की चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा विधायक हैं।

पांच निकायों के चुनाव में पार्षदों से ज्यादा दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
राजसमंद: Rajasthan urban local body elections 2026 राजसमंद नगर परिषद में विधायक दीप्ति माहेश्वरी के सामने भाजपा का मजबूत बोर्ड बनाने की चुनौती है। जिला मुख्यालय की नगर परिषद में जीत का राजनीतिक संदेश पूरे जिले में जाएगा। स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य और वार्ड स्तर के समीकरण परिणाम तय करेंगे। भाजपा में टिकट वितरण को लेकर खींचतान भी चुनौती बन सकती है। विधायक, सांसद और जिलाध्यक्ष अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की कोशिश में हैं। कांग्रेस भी वापसी के लिए ताकत लगाएगी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष के सामने भी यह पहला बड़ा संगठनात्मक इम्तिहान है।
आमेट: Amet Nagar Palika election 2026 : आमेट नगर पालिका में विधायक सुरेंद्रसिंह राठौड़ के सामने भाजपा का बोर्ड बनाने की चुनौती है। पिछले चुनाव में यहां कांग्रेस का बोर्ड बना था। भाजपा स्थानीय समीकरण साधकर सत्ता हासिल करना चाहेगी, जबकि कांग्रेस पुराने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश करेगी। पूर्व विधायक गणेशसिंह परमार और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे योगेंद्रसिंह परमार की प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी ।
नाथद्वारा: नाथद्वारा का चुनाव सबसे चर्चित मुकाबलों में रहेगा। भाजपा विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़ के सामने पार्टी का बोर्ड बनाने की चुनौती है। वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के सामने कांग्रेस के पुराने प्रभाव को फिर मजबूत करने की परीक्षा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद जोशी के लिए यह अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने का मौका होगा । दूसरी ओर मेवाड़ के ढाई साल के कार्यकाल और स्थानीय संगठन की सक्रियता का भी आकलन होगा। Nathdwara municipal election 2026
भीम-देवगढ़: भीम में विधायक हरिसिंह रावत के सामने दो निकायों की जिम्मेदारी है। देवगढ़ में भाजपा का बोर्ड बरकरार रखना, भीम में पहली बार भाजपा का बोर्ड बनाना उनकी बड़ी चुनौती होगी। कांग्रेस के पूर्व विधायक सुदर्शनसिंह रावत के सामने भी दोनों निकार्यों में पार्टी को मजबूत करने की परीक्षा है। 2023 की विधानसभा हार के बाद निकाय चुनाव उनके लिए राजनीतिक वापसी का मौका हो सकता है।
युवा जिलाध्यक्षों का भी इम्तिहान
Rajsamand Nagar Parishad election : भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल और कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदित्य प्रताप सिंह के लिए भी चुनाव संगठनात्मक क्षमता साबित करने का मौका है। मजबूत प्रत्याशी चयन, टिकट के बाद बगावत रोकना और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना दोनों के सामने चुनौती होगी। पांचों निकायों का प्रदर्शन उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में अहम रहेगा।



