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Udaipur Royal Family : विश्वराज सिंह मेवाड़ का राजतिलक चित्तौड़ दुर्ग पर, देखिए शाही कार्यक्रम

Jaivardhan News November 20, 2024 1 minute read

Udaipur Royal Family : उदयपुर व मेवाड़ के पूर्व राज परिवार के मुखिया व पूर्व सांसद महेंद्रसिंह मेवाड़ के निधन के बाद अब उनके बेटे विश्वराज सिंह मेवाड़ को वंश परंपरा के अनुसार राजगद्दी पर बिराजने व राजतिलक की रस्म व दस्तूर 25 नवंबर को शाही परम्परा के तहत होगा। परम्परानुसार ही यह कार्यक्रम चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित फतह प्रकाश महल में 25 नवंबर सुबह 10 बजे होगा। इस कार्यक्रम में मेवाड़ के समस्त पूर्व राजपरिवार से जुड़े सदस्य, पूर्व राव व उमराव के परिवारों के साथ देशभर के विभिन्न पूर्व राजपरिवारों के सदस्य भी शामिल होंगे। मेवाड़ की प्राचीन राजधानी रहे चित्तौड़गढ़ महाराणा विक्रमादित्य के बाद मेवाड़ रॉयल फेमिली की 77वीं पीढ़ी के उत्तराधिकारी विश्वराजसिंह मेवाड़ के राजतिलक का दस्तूर फिर उसी जगह होने जा रहा है।

Udaipur News : मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के मुखिया महेंद्रसिंह मेवाड़ का 10 नवंबर 2024 को अनन्ता मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान निधन हो गया था। उसके बाद पैतृक आवास समोर बाग से दूसरे दिन 11 नवंबर को शाही परम्परानुसार अंतिम यात्रा निकाली और अंतेष्टी की रस्म निभाई गई। उसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित देश व प्रदेश के कई राजनेता, पूर्व राजपरिवारों के सदस्य व मेवाड़ के लोग शामिल हुए थे। महेंद्रसिंह मेवाड़ के निधन के बाद अब 21 नवंबर को बारहवें की रस्म निभाई जाएगी। देलवाड़ा के पूर्व राज परिवार सदस्य प्रज्ञात सिंह देलवाड़ा ने बताया कि कार्यक्रम में देशभर के पूर्व राजघरानों के सदस्य, रिश्तेदार, गणमान्य नागरिकों के अलावा आमजन सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।

Vishvraj Singh Mewar : चित्तौड़गढ़ में राजगद्दी बिराजने का दस्तूर

Vishvraj Singh Mewar : मेवाड़ जन उदयपुर संस्था के संयोजक कंवर प्रताप सिंह झाला ‘तलावदा’ बताते हैं कि बारहवें दिन की क्रिया जो 21 नवंबर को पूरी हो जाएगी। इसके बाद राजगद्दी पर बिराजने का दस्तूर कार्यक्रम का मुहूर्त 25 नवंबर को निकला है। ज्यादातर लोगों की भावना थी कि यह आयोजन चित्तौड़गढ़ के फतह प्रकाश महल में किया जाए, वहां से सात जिले कवर हो जाएंगे और सभी पहुंच जाएंगे। कार्यक्रम के बाद मेवाड़ वहां से उदयपुर आकर कुल के देवताओं के दर्शन कर एकलिंगजी के दर्शन करेंगे। ‘तलावदा’ ने बताया कि एकलिंगजी में उनका शोक भंग कराया जाएगा। एकलिंगजी के पुजारी उनको रंग देंगे। उसके बाद वे सफेद पाग के बाद में कलर की पाग बांध सकते है। वहां से समोरबाग पैलेस आएंगे जहां पर परिवार और अन्य रंग देंगे उसके बाद वे अगले दिन से रंग वाली पाग बांध सकेंगे।

Mewar Royal Family : सिसोदिया वंश की 77वें राणा होंगे विश्वराज मेवाड़

Mewar Royal Family : उदयपुर पूर्व राजपरिवार का इतिहास पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्पद है, जहां के राजपरिवार के साथ लोगों में देशभक्ति, मातृभूमि के लिए मर मिटने को तैयार हो जाते हैं। महाराणा प्रताप के वंशज विश्वराजसिंह मेवाड़ अब सिसोदिया पूर्व राजवंश की 77वीं पीढ़ी के राणा होंगे, जो अभी नाथद्वारा के विधायक भी है। वे पहली बार भाजपा से चुनाव लड़े और विधायक बने। इनके पिता स्व. महेंद्रसिंह मेवाड़ भी चित्तौड़गढ़ से सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी पुत्रवधू महिमा कुमारी मेवाड़ अभी राजसमंद की सांसद है। विश्वराज सिंह मेवाड़ आज भी मेवाड़ी बोलते हैं। विश्वराज सिंह अक्सर राजशाही ड्रेस में, हाथों मे तलवार थामे और मेवाड़ी पगड़ी के साथ लोगों के बीच नजर आते हैं। Mahendra Singh Mewar

Vishvaraj Singh Mewar : विश्वराजसिंह का परिचय

Vishvaraj Singh Mewar : विश्वराजसिंह अब मेवाड़ राजवंश के 77वें उत्तराधिकारी के रूप में महाराणा पदवी पर बिराजित होंगे। इनका जन्म 18 मई 1969 को हुआ। तिथि के आधार पर देखा जाए, तो महाराणा प्रताप की जन्म जयंती के दिन ही विश्वराजसिंह मेवाड़ का जन्म हुआ, जो भी अजब संयोग है। इन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज मुंबई से अर्थशास्त्र में स्नातक की। वे अभी नाथद्वारा के विधायक है, जबिक उनकी पत्नी महिमा कुमारी राजसमंद की सांसद है। वे अक्सर मेवाड़ी में ही बातें करते हैं और संबोधन भी अक्सर मेवाड़ी भाषा में ही रहता है। साथ ही अक्सर मेवाड़ी पगड़ी, राजशाही पोशाक, हाथ में तलवार थामे दिखते हैं।

Mahendra Singh Mewar : महेंद्रसिंह के पास 40 साल महाराणा की पदवी

Mahendra Singh Mewar : विश्वराजसिंह मेवाड़ के पिता महेंद्रसिंह मेवाड़ के राजतिलक व महाराणा की पदवी पर 19 नवंबर 1984 को बिराजित हुए थे। उससे पहले महाराणा भगवतसिंह मेवाड़ थे, जिनका निधन होने के बाद ज्येष्ठ पुत्र महेंद्रसिंह होने से उन्हें महाराणा की पदवी पर बिराजित किया गया। इस तरह करीब 40 साल तक वे महाराणा की पदवी पर रहे। इस दौरान महेंद्रसिंह मेवाड़ चित्तौड़गढ़ से एक बार सांसद भी रह चुके हैं।

Royal Family Udaipur : बहादुरी के इनाम का पद है राव, उमराव

Royal Family Udaipur : भींडर पूर्व राजपरिवार के सदस्य रणधीरसिंह भींडर ने कहा कि पहले मेवाड़ राजपरिवार के वक्त महाराणा के साथ युद्ध में बेहतर कौशल देखाने वाले, युद्ध जिताने या शहीद होने पर उनको राव, उमराव का पद दिया जाता था। इस तरह मेवाड़ में महाराणा अमरसिंह के वक्त 16 उमराव घोषित किए थे। बाद में अलग अलग महाराणा द्वारा कुछ और उमराव बनाए, जिससे अब करीब 23 उमराव है। वे उमराव अपने अपने क्षेत्र में सर्व जाति समाज को एक साथ लेकर चलते हैं और उनकी समस्याओं का निस्तारण करने के लिए अग्रणी भूमिका निभाते थे। महाराणा प्रताप जी ने तो यही सिखाया कि सब समाज को साथ लेकर चलो। तभी तो उस वक्त हकीम खां सूर भी थे, तो भामाशाह, राजपूत व आदिवासी भील तक साथ रहकर लड़ृे थे।

क्या है नजराना पेश की परम्परा

पूर्व राजपरिवार सदस्य रणधीरसिंह भींडर बोले कि मेवाड़ में महाराणा की पदवी जिसके पास है, वह हमारे ट्रेडिशनल हेड हैं। उनमें हमारी आस्था है, वो पाग (साफा) जो है, उसमें हमारा विश्वास है, हमारे पूर्वजों ने जो कुछ बलिदान दिए, जो लड़ाइयां लड़ी, उसका प्रतीक वह पाग है और उस प्रतीक पर हम विश्वास करते हैं। एक तरह से सभी राव, उमराव मिलकर हेड को बनाते हैं। हम उन्हें बधाई के साथ शुभकामनाएं पेश करते हैं, यही नजराना की रस्म है। ताकि वे भविष्य में ऐसे निर्णय लें, जो मेवाड़ के लिए अच्छे हो, जनहित के हो।

मेवाड़ में हर समाज कर रहा तैयारियां

बड़ी सादड़ी पूर्व राजपरिवार के सदस्य प्रतापसिंह झाला “तलावदा” ने बताया कि चित्तौड़ में विश्वराजसिंह मेवाड़ के राजतिलक की रस्म को लेकर समूचे मेवाड़ के लोग उत्साहित है। इसके तहत क्षत्रिय राजपूत समाज के अलावा ब्राह्मण समाज, भील समाज तो क्या गाडोलिया समाज के प्रतिनिधियों के भी फोन आ रहे हैं कि वे भी राजतिलक की रस्म में शामिल होकर समाज की तरफ से कुछ भेंट करना चाहते हैं। मेवाड़ के महाराणा पदवी की रस्म में हमेशा सर्वसमाज साथ रहा है। मेवाड़ राजपरिवार का इतिहास और यह परम्पराएं पिछले 1400 साल से निभाई जा रही है, जिसमें सर्वसमाज शामिल रहता है।

Randhir Singh Bhindar बोले- जनसेवा से नहीं हो सकते रिटायर्ड

Randhir Singh Bhindar : पूर्व राजपरिवार के सदस्य रणधीरसिंह बोले कि पूर्व राजपरिवार व मेवाड़ की परम्परा को लेकर समूचे मेवाड़ के लोगों की पूर्व राजपरिवारों के प्रति गहरा विश्वास है। इसी वजह से लोगों को जुड़ाव भी है। जब महाराणा महेंद्रसिंंह का निधन हुआ तो 11 नवंबर को उदयपुर में असंख्य लोग उमड़े। क्या उन लोगों को लाने के लिए कोई बसें थोड़े ही लगाई गई थी। सभी लोग अपनी श्रद्धा व विश्वास से ही तो आए थे। समोर बाग से महासतिया तक कई किलोमीटर तक पैदल भी चलें। इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था व राजनीति अलग चीज है और पूर्व राजपरिवार के प्रति लोगों का रिश्ता, विश्वास अलग है। भींडर बोले कि क्या मैं चुनाव हार गया, तो जनता के बीच नहीं जाऊंगा, लोगों की बात नहीं सुनेंगे। मैं इस जिम्मेदारी से कभी रिटायर्ड नहीं हो सकता हूं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चाहे मैं चुनाव जीत जाऊं या नहीं। लोग मुझे पर विश्वास करते हैं और इसीलिए किसी कार्य से मेरे पास आते हैं, मैं उनका कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।

समय के बड़े पाबंद थे महेंद्रसिंंह मेवाड़

पूर्व राजपरिवार सदस्य रणधीरसिंह भींडर कहते हैं कि दिवंगत महेंद्रसिंह मेवाड़ समय के बड़े पाबंद थे। तय समय से अगर पांच मिनट भी देरी हो जाए, तो वे हर किसी को मुंह पर टोक देते थे। साथ ही उनका आमजन के प्रति जो व्यवहार था, वह एक जैसा चाहे। सभी धर्म, जाति, समुदाय के लोगों से एक जैसा व्यवहार देखा गया। भींडर बोले कि मैं तो यह कहूंगा कि मेवाड़ ने एक अच्छे व्यक्तित्व को खो दिया।

प्रतापसिंंह झाला बोले- महाराणा पूर्व नहीं, राजपरिवार पूर्व है

मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के सदस्य रावत प्रतापसिंंह झाला “तलावदा” ने कहा कि मेवाड़ के राजा तो एकलिंग नाथ है। मेवाड़ सिसोदिया कुल के मुखिया महाराणा महेंद्रसिंह मेवाड़ थे। अब महाराणा की पदवी विश्वराजसिंह मेवाड़ के नाम के आगे लगेगी। महाराणा तो पदवी है। इसलिए पूर्व राजपरिवार कह सकते हैं, मगर महाराणा तो एक पदवी है, जो आज भी है। साथ ही मेवाड़ के राजा तो सृष्टि के रचियता यानि एकलिंगनाथ है, जो हमेशा मेवाड़ के राजा रहेंगे। इसलिए तो मेवाड़ के महाराणा को एकलिंग का दीवान कहा जाता है।

Mewar History : चित्तौड़ में राजतिलक का यह है पुराना इतिहास

Mewar History : 16वीं सदी में करीब 493 साल पहले महाराणा विक्रमादित्य का राजतिलक चित्तौड़गढ़ में हुआ था, जो राणा सांगा के पुत्र थे। एक षड़यंत्र के तहत विक्रमादित्य की हत्या हो गई थी। तब अराजक स्थिति में बनवीर ने विक्रमादित्य के छोटे भाई उदयसिंह की हत्या की साजिश रची। इसके तहत बनवीर उसे मारने के लिए कक्ष में पहुंचे, जहां पन्नाधाय ने बनवीर के षड़यंत्र को भांप लिया था। इस पर पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन को उदयसिंंह की सेज में सुला दिया और उदयसिंह को चंदन के कपड़े पहना दिए। फिर बनवीर ने चंदन को ही उदयसिंह समझकर हत्या कर दी। फिर पन्नाधाय उदयसिंह को लेकर कुंभलगढ़ पहुंच गई, जहां भामाशाह उदयसिंह का पालन पोषण हुआ और कुंभलगढ़ में ही राजतिलक हुआ था। उसके बाद महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर बसाया। उसके बाद महाराणा प्रताप का राजतिलक उदयपुर में ही हुआ और कई वर्षा से उदयपुर मेवाड़ राजपरिवार के राजतिलक की रस्म उदयपुर में निभती रही है, लेकिन इस बार उसी मेवाड़ पूर्व राजवंश के मुखिया विश्वराजसिंह मेवाड़ के राजतिलक की रस्म वापस चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित फतहप्रकाश पैलेस में होगी।

Udaipur Royal Family : मेवाड़ पूर्व राजघराने के मुखिया महेंद्रसिंह का निधन, उदयपुर संभाग में शोक
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